अगले दस वर्षों में भारत में रूम एयर कंडीशनर (एसी) की संख्या में 13-15 करोड़ की वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे 2035 तक देश की अधिकतम बिजली मांग 180 गीगावाट तक बढ़ सकती है, जो कुल अनुमानित मांग का 30% होगी। यह वृद्धि संभावित रूप से बिजली संकट को जन्म दे सकती है।
कैसे बच सकते हैं बिजली संकट से?
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के भारत ऊर्जा एवं जलवायु केंद्र (IECC) के एक अध्ययन के अनुसार, यदि भारत अगले दशक में एसी की ऊर्जा दक्षता को दोगुना कर लेता है, तो इस गंभीर बिजली संकट से बच सकता है। साथ ही, इससे उपभोक्ताओं को 2.2 लाख करोड़ रुपये तक की बचत भी होगी।
बिजली की बढ़ती खपत में एसी की अहम भूमिका
अध्ययन बताता है कि बिजली की कुल मांग बढ़ाने में एसी की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत में आर्थिक विकास और एसी की बढ़ती जरूरत के चलते घरेलू बिजली खपत का हिस्सा 2012-13 में 22% था, जो 2022-23 तक बढ़कर 25% हो गया है।
गर्मी का असर: एसी की बिक्री में उछाल!
गर्मी जल्द शुरू होने के कारण मौजूदा वित्त वर्ष में देश में करीब 14 लाख एसी बिकने की संभावना है। 2025-26 तक इसमें 30% की वृद्धि होकर यह आंकड़ा 18 लाख तक पहुंच सकता है। गोदरेज एंटरप्राइजेज के एप्लायंसेज कारोबार प्रमुख कमल नंदी के अनुसार, इस बार गर्मियों के जल्दी शुरू होने से एसी की मांग में 30-35% तक की वृद्धि हो सकती है। इसे देखते हुए कंपनियों ने नए और उन्नत उत्पाद बाजार में उतारे हैं।
क्या ऊर्जा दक्षता बढ़ाकर बिजली संकट से बचा जा सकता है?
यदि सरकार और उपभोक्ता ऊर्जा-कुशल एसी अपनाते हैं, तो न केवल बिजली की मांग को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि उपभोक्ताओं के बिजली खर्च में भी भारी कमी लाई जा सकती है।
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