बारिश के मौसम के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ना एक आम बात है, लेकिन इसके साथ ही डेंगू का खतरा भी तेजी से सिर उठाता है। देशभर में डेंगू के मामलों में हर साल भारी वृद्धि देखी जाती है, और यह बीमारी अब पहले से ज्यादा घातक रूप लेती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू केवल एक तरह का नहीं होता, बल्कि इसके कई प्रकार होते हैं, जो अलग-अलग लक्षणों और गंभीरता के साथ सामने आते हैं।
ऐसे में ज़रूरी है कि लोग डेंगू के विभिन्न प्रकारों, लक्षणों और उससे बचाव के तरीकों की सही जानकारी रखें, ताकि समय रहते सतर्कता बरती जा सके और जीवन की रक्षा की जा सके।
डेंगू के प्रकार: एक वायरस, चार रूप
डेंगू वायरस को चार प्रमुख प्रकारों (serotypes) में बांटा गया है — DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4। एक व्यक्ति एक ही प्रकार से संक्रमित होने के बाद उस प्रकार के प्रति इम्यून हो सकता है, लेकिन अन्य प्रकारों से फिर से संक्रमित हो सकता है। दूसरी बार डेंगू होना अधिक खतरनाक साबित हो सकता है, और इससे डेंगू हेमोरेजिक फीवर (DHF) या डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) होने का खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू के मुख्य लक्षण: इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
डेंगू के लक्षण अक्सर सामान्य वायरल बुखार से मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन कुछ विशिष्ट संकेत इसकी पहचान में मदद करते हैं:
तेज बुखार (104°F या अधिक)
सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द
जोड़ों व मांसपेशियों में तेज़ दर्द (जिस कारण इसे ‘हड्डी तोड़ बुखार’ भी कहा जाता है)
त्वचा पर चकत्ते या रैशेस
भूख न लगना और कमजोरी
उल्टी या मतली
कुछ मामलों में मसूड़ों या नाक से रक्तस्राव
यदि डेंगू हेमोरेजिक फीवर या शॉक सिंड्रोम विकसित हो जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है और तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी हो जाती है।
बचाव ही है सबसे कारगर उपाय
डेंगू का कोई विशेष टीका या पुख्ता इलाज नहीं है। ऐसे में बचाव ही सबसे प्रभावी तरीका है। नीचे दिए गए उपाय अपनाकर डेंगू से बचाव किया जा सकता है:
खुले पानी को जमा न होने दें: मच्छर रुके हुए साफ पानी में पनपते हैं, जैसे कूलर, बाल्टी, गमले आदि।
पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें: विशेषकर सुबह और शाम के समय, जब मच्छर ज्यादा सक्रिय होते हैं।
मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें: सोते समय मच्छरदानी और घर में मच्छर भगाने वाले साधनों का प्रयोग करें।
घरों और आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें: गंदगी और नमी मच्छरों को आकर्षित करती है।
स्कूलों और दफ्तरों में भी सतर्कता रखें: बच्चों और कर्मचारियों को जागरूक करना जरूरी है।
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