चेन्नई (एजेंसी/वार्ता) भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने बुधवार को 24वीं राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिकता योजना (एनओएस-डीसीपी) और तत्परता बैठक आयोजित की आईसीजी के महानिदेशक और एनओएस-डीसीपी के अध्यक्ष वीएस पठानिया ने बैठक की अध्यक्षता की जिसमें लगभग 100 प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों, केंद्र और राज्य सरकार के विभागों व एजेंसियों तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बंदरगाहों एवं तेल प्रबंधन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया कि बैठक के दौरान भारतीय जलक्षेत्र में किसी भी तेल रिसाव की स्थिति से निपटने के लिए सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करने के वास्ते आम उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय क्षमताओं के साथ तैयार रहने की समीक्षा की गयी।
वर्तमान में, कच्चे तेल के तीसरे सबसे बड़े आयातक के रूप में, भारत को जहाजों के माध्यम से तेल की बड़ी मात्रा में प्राप्त होता है जहाजों के माध्यम से तेल की मात्रा। इसी तरह एक प्रमुख रासायनिक आयातक देश के रूप में भारत दुनिया में छठे स्थान पर है तेल और रसायन दोनों के छलकने से भारतीय समुद्री क्षेत्रों और इससे जुड़े तटीय जनसंख्या के लिए अंतर्निहित जोखिम उत्पन्न होते हैं।
साथ ही समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, उद्योग और पर्यटन उद्योग से जुड़ें विभिन्न प्रतिष्ठानों पर भी प्रतिकूल असर होता है श्री पठानिया ने अपने संबोधन में कहा कि आईसीजी समुद्र में समुद्री तेल और रासायनिक फैलाव सहित क्षेत्र और इसके संसाधनों के संभावित खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे-जैसे नई कमजोरियां उभर कर सामने आती हैं, वैसे ही हितधारकों को मजबूत भागीदारी, प्रभावी समन्वय के माध्यम से सहयोग और विकासशील प्रौद्योगिकी के सर्वोत्तम अभ्यासों को आत्मसात करने के अवसर को पहचानना चाहिए।
एजेंसी/वार्ता
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