क्या आप भी बार-बार पेशाब आने पर उसे टाल देते हैं? ऑफिस में मीटिंग हो, सफर में सहूलियत न हो या किसी और वजह से अगर आप नियमित रूप से पेशाब रोकने की आदत में हैं, तो यह चेतावनी आपके लिए है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत न सिर्फ मूत्राशय को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि किडनी, यूरिनरी ट्रैक्ट और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारे शरीर में बनने वाला मूत्र शरीर की विषाक्त चीजों को बाहर निकालता है। लेकिन जब इसे समय पर बाहर न निकाला जाए, तो ये टॉक्सिन्स शरीर के अंदर ही जमने लगते हैं, जो कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
पेशाब रोकने की आदत क्यों बनती है ख़तरनाक?
यूरोलॉजिस्ट डॉ. बताती हैं:
“बार-बार पेशाब रोकने से ब्लैडर की मसल्स पर दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और मूत्र को पूरी तरह निकालने में दिक्कत आने लगती है। यह आदत आगे चलकर किडनी डैमेज और यूटीआई (Urinary Tract Infection) जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है।”
पेशाब रोकने से हो सकती हैं ये प्रमुख बीमारियां:
1. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)
मूत्र देर तक ब्लैडर में रहने से बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो सकता है, जिससे पेशाब में जलन, दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
2. किडनी पर असर
अगर मूत्र समय पर नहीं निकाला गया, तो इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। विषैले पदार्थ और बैक्टीरिया किडनी तक पहुंचकर सूजन, संक्रमण या फेलियर जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।
3. ब्लैडर फंक्शन पर असर
लगातार पेशाब रोकते रहने से ब्लैडर की संवेदनशीलता घट जाती है। इससे व्यक्ति को पेशाब की जरूरत महसूस नहीं होती, जिससे मूत्र अधिक देर तक जमा होता रहता है।
4. पेल्विक फ्लोर डिसऑर्डर
यह समस्या खासकर महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। बार-बार पेशाब रोकने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे आगे चलकर पेशाब पर कंट्रोल खोना (इनकंटिनेंस) जैसी समस्याएं होती हैं।
5. पथरी (स्टोन) का खतरा
ज्यादा देर तक मूत्र रुकने से उसमें मौजूद खनिज पदार्थ एक जगह जमने लगते हैं। इससे ब्लैडर या किडनी में स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे पहचानें कि आपकी आदत बन चुकी है खतरनाक?
पेशाब करते वक्त दर्द या जलन महसूस होना
बार-बार पेशाब आने की जरूरत लेकिन इच्छा न होना
पेशाब के बाद भी अधूरा-सा महसूस होना
पेशाब में बदबू या रंग में बदलाव
पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द रहना
यदि ये लक्षण अक्सर दिखें, तो तुरंत किसी यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।
डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
किडनी विशेषज्ञ कहते हैं:
“शरीर की जरूरत को नजरअंदाज करना कभी भी अच्छा नहीं होता। जैसे भूख और नींद को रोका नहीं जा सकता, वैसे ही पेशाब को भी समय पर करना जरूरी है।”
बचाव के आसान उपाय:
हर 2 से 3 घंटे में पेशाब जरूर करें, भले ही ज़्यादा इच्छा न हो।
दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।
यात्रा या काम के दौरान ऐसे स्थान चुनें जहां साफ शौचालय उपलब्ध हों।
बच्चों को भी शुरुआत से ही यह आदत सिखाएं कि पेशाब को न रोकें।
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