भारत के शीर्ष खिलाड़ी सौरव घोषाल ने स्क्वाश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए इसे स्कूलों में शुरू करने के साथ ही देश के कोचों के प्रशिक्षण के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने की मांग की।
घोषाल ने आगामी दिल्ली मैराथन की जर्सी अनावरण समारोह के दौरान कहा, ‘‘स्क्वाश को स्कूलों में पेश किया जाना चाहिए, इससे कम समय में अच्छे परिणाम मिलेंगे। स्कूलों में स्क्वाश के होने से बच्चे इस खेल से जुड़ेंगे, उनके माता-पिता इसमें शामिल होंगे। इससे स्क्वाश के लिए एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा।’’
राष्ट्रमंडल खेलों में एकल पदक जीतने वाले देश के पहले खिलाड़ी 37 वर्षीय घोषाल ने कहा कि जब उन्होंने शुरुआत की थी तब की तुलना में आज खेल का स्तर काफी स्तर ऊंचा है और भारत विश्व मंच पर बहुत प्रतिस्पर्धी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 25 साल से भी पहले स्क्वाश शुरू किया था, अब इसका स्तर काफी ऊंचा है और हम विश्व मंच पर बेहद प्रतिस्पर्धी हैं। अगला कदम वैश्विक स्तर पर जीत हासिल करना और दबदबा बनाना है।” उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिये खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके खेल के स्तर को ऊंचा करना होगा।” उन्होंने लास एंजिलिस ओलंपिक (2028) में स्क्वाश की वापसी पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इससे खेल की लोकप्रियता को बढ़ावा मिलेगा।
इस खेल की महिला वर्ग की दिग्गज खिलाड़ी जोशना चिनप्पा ने पद्मश्री के लिए चुने जाने पर कहा कि वह सम्मानित महसूस कर रही हैं। चिनप्पा ने कहा, ”केंद्र सरकार द्वारा पद्मश्री के लिए चुने जाने पर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मुझे लगता है कि यह सही समय पर आया है और मुझे बहुत खुशी है कि मेरे प्रयासों को मान्यता मिली है।” उन्होंने कहा कि घोसाल और दीपिका पल्लीकल जैसे खिलाड़ियों ने इस खेल के लिए देश में अच्छा मंच तैयार किया है।
– एजेंसी
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