मध्य प्रदेश के सागर जिले के नरेंद्र गुप्ता ने यह साबित कर दिया है कि संघर्ष और मेहनत का फल जरूर मीठा होता है। कभी साइकिल पर दूध बेचने वाले नरेंद्र आज हर महीने 70,000 रुपये की घर बैठे कमाई कर रहे हैं और दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं। नरेंद्र की यह सफलता की कहानी न केवल प्रेरक है, बल्कि यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कैसे जीवन बदल सकता है।
शुरुआत में मुश्किलें, लेकिन हार नहीं मानी
नरेंद्र गुप्ता ने पढ़ाई के बाद महज 23 साल की उम्र में दूध बेचने का काम शुरू किया था। शुरुआत में वह साइकिल से दूध सप्लाई करते थे और पाउचिंग यूनिट लगाने के बाद नुकसान और कर्ज में डूब गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष करते रहे।
धीरे-धीरे उन्होंने डेयरी प्लांट स्थापित किया और मीठा दही, पनीर, घी और खोया जैसे उत्पाद तैयार करने लगे। इससे काम तो बढ़ा लेकिन उत्पादन सीमित था, जिससे संतुष्टि नहीं मिल रही थी।
PMFME योजना बनी गेम चेंजर
नरेंद्र ने प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PMFME) योजना के तहत 26 लाख रुपये का लोन लिया, जिसमें 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस लोन से उन्होंने डेयरी प्लांट के लिए आधुनिक उपकरण खरीदे।
अब वह हर दिन 1200 से 1500 लीटर दूध का प्रोसेसिंग कर रहे हैं और इससे हर महीने ₹70,000 से अधिक की कमाई कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है।
सरकार की योजना से बढ़ रहा ग्रामीण उद्यमिता का आत्मविश्वास
सागर के उद्यानिकी विकास अधिकारी रामकुमार यादव का कहना है कि PMFME योजना के तहत कई युवाओं को स्टार्टअप में मदद मिल रही है। योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी, तकनीकी मार्गदर्शन और लोन सुविधा प्रदान की जाती है।
नरेंद्र गुप्ता की सफलता बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल और दृढ़ संकल्प किसी भी व्यक्ति को आत्मनिर्भर बना सकता है। यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं।
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