रोहन: फैशन की भी हद होती है। महीने में डेढ दो किलो तो तुम
लिपिस्टिक ही खा जाती हो।
पत्नी : क्यों झूठ बोलते हो?
पौन किलो के करीब तो आपके पेट में भी जाती होगी।😜😂😂😂😛🤣
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मनोचिकित्सक रोहन को जल्दी से कहीं जाना था। मगर रिसेप्शनिस्ट ने
बताया कि अभी तीन लेडी पेशेंट और बैठी हैं। उन्हें जल्दी से निबटाने की
मंशा से मनोवैज्ञानिक दबाव डालते हुए मन्नू ने पहली से कहना शुरू किया
– ‘सुनिए! आपकी समस्या क्या है? खाना, खाना, सिर्फ खाना! जबकि
मैंने पहले ही आपसे कहा था कि खुराक कम करें, खाने से जी हटाएँ।
क्या नाम है आपकी लड़की का?
स्त्री बोली – जी इमरतीकुमारी!
रोहन बोले – ‘देखा! बच्ची के नाम में भी तुम्हारे खाने के अलावा कुछ
नहीं झलकता!
फिर रोहन दूसरी स्त्री से बोले – ‘और तुम! पहले दरजे की कंजूस! पहले भी कह चुका हूँ, जब तक कंजूसी की आदत नहीं छोड़ोगी ऐसे ही परेशान रहोगी। क्या नाम है तुम्हारी बेटी का?
वह बोली – अशर्फीदेवी!
रोहन ने उलाहना दिया – ‘देखा।
तो यह नाम भी धन-दौलत का ही परिणाम है।
तुम्हारे लगाव का ही परिणाम है।
तभी स्त्री नंबर तीन ने अपने छह वर्षीय बेटे का हाथ पकड़कर उठाया।
और बोली – चल बेटे रतिरमण!
अब अपनी खैर नहीं। और सेकंडों में वहाँ से बाहर हो गई।😜😂😂😂😛🤣
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