प्याज भारत में हर घर का अहम हिस्सा है, लेकिन कभी यह किसानों के लिए आंसू लेकर आता है, तो कभी उपभोक्ताओं की आंखों में आंसू। प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव अक्सर चर्चा का विषय होता है, और हाल ही में प्याज की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, जो किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। पिछले सात दिनों में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो पहले 4 हजार रुपए के करीब थी, अब घटकर 1800 रुपए तक आ गई है।
इस गिरावट का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। अगर यह गिरावट जारी रही, तो किसानों के लिए उत्पादन लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा। प्याज के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के कारण किसानों और किसान संगठनों ने कई बार इस शुल्क को हटाने की मांग की है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया। इससे निर्यातित प्याज विदेशों में महंगे हो रहे हैं और घरेलू बाजार में इसकी अधिक आपूर्ति हो रही है।
750 रुपए की भारी गिरावट
नासिक जिले और लासलगांव जैसी प्रमुख मंडियों में रोजाना दो से ढाई लाख क्विंटल प्याज की आवक हो रही है। पिछले सात दिनों में प्याज की कीमत में 20 रुपए प्रति किलो की गिरावट आई है। अब प्याज का औसत बाजार भाव 1750 से 1800 रुपए के बीच है। किसान चिंतित हैं कि अगर कीमतें इसी तरह गिरती रहीं, तो उत्पादन लागत निकालना और भी कठिन हो जाएगा।
नासिक, जो भारत में प्याज की सबसे बड़ी उत्पादक मंडी है, यहाँ के किसान केंद्र सरकार से कीमतों में गिरावट को रोकने की उम्मीद कर रहे हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 7 जनवरी को प्याज की औसत कीमत 41.56 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो अब 13 जनवरी को घटकर 39.72 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। इसका मतलब यह है कि एक हफ्ते में प्याज की औसत कीमत में 1.84 रुपए की कमी आई है। दिल्ली में प्याज की कीमत भी 40 रुपए से घटकर 38 रुपए हो गई है।
यह गिरावट किसानों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है – क्या इससे उनका उत्पादन खर्च भी पूरा होगा?
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