अब्बू (अखबार का नया अंक दिखाते हुए): संपादक महोदय रोहन जी, पूरा अखबार छपने के लिए तैयार है। बस अंतिम पृष्ठ पर एक कॉलम में सात-आठ पंक्तियों की जगह बच गई है। क्या करूँ ? कहाँ से ख़बर लाऊँ ?
रोहन(झल्लाते हुए): अबे इतनी छोटी-सी बात के लिए ख़बर लाने की क्या ज़रूरत है? जो मैं कहता हूँ वो छाप।
अब्बू : बोलो।
रोहन : रात दरियागंज में बम फटने से छः मौतें। इसको हैडिंग बना और नीचे पंक्तियाँ लिख। कल रात्रि के द्धितीय प्रहर में दरियागंज के फुटपाथ पर बम विस्फोट हुआ जिसमे एक ओबेसी और पांच मवेशी मारे गए।
अब्बू : अब भी दो लाइनों की जगह बच रही है।
रोहन : बाद में तहकीकात करने पर मालूम चला कि खबर झूठी थी। महज अफवाह थी। इसे खबर के नीचे कोष्ठक में छापना।😜😂😂😂😛🤣
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अब्बू : क्या बात है गोलू मियाँ ? अकेले-अकेले क्यों हंस रहे हो!
रोहन: अबे तू सुनेगा तो तू भी दांत फाड़ कर हंसने लगेगा।
अब्बू : ऐसा क्या ? ज़रा कुछ बताओ!
रोहन: कल मैं एक हॉकी मैच देखने गया था। जिस नेता को वहां मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। उन्होंने मैच में अंत में भाषण दिया–“भाइयों-और उनकी बहनों, हमारे देश में लकड़ी की कमी नहीं है। सारे खिलाडियों के हाथों में हॉकी देखकर मुझे यह बात समझ में आई मगर यह देखकर दुःख हुआ कि हमारा देश “गेंद” निर्माण में बेहद ग़रीब है। बेचारे सारे खिलाडी पूरे खेल के दौरान एक ही बाल के पीछे भागते नज़र आये। मैं प्रधान मंत्री जी से अनुरोध करूँगा कि अधिक से अधिक बॉल बनाई जाएँ। ताकि हर हॉकी खिलाडी के पास अपनी-अपनी गेंद हो और सभी आराम से गोल कर पाएं। खिलाडियों की सहूलियत की लिए हम मैदान के चारों तरफ अधिक से अधिक गोल पोस भी लगवा देंगे। ताकि कम से कम सभी खिलाडी आसानी से गोल कर सके।
अब्बू (मुँह बनाते हुए): तो इसमें इतना दाँत फाड़ने की बात क्या है। नेताजी ठीक तो कह रहे थे।😜😂😂😂😛🤣
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