दही भारतीय रसोई का staple हिस्सा है—पाचन सुधारने से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने तक इसे सभी उम्र की महिलाओं से लेकर बुजुर्गों और बच्चों द्वारा भरा-पूरा आहार माना जाता है। लेकिन क्या रोज़ाना दही खाने में कोई छुपा जोखिम भी हो सकता है?
फ़ायदे: जब दही हो सेहतमंद साथी
दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स, जैसे कि लैक्टोबैसिलस, पाचन तंत्र में ‘अच्छे’ बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाकर कब्ज़, बदहजमी जैसी समस्याओं को कम करते हैं। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है क्योंकि विटामिन बी12, राइबोफ्लेविन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व इसका हिस्सा होते हैं।
यह मोटापे को नियंत्रित करने में सहायता करता है—प्रोटीन और फाइबर से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे भूख में कमी आती है । त्वचा और हड्डियों के लिए भी यह किफायती स्रोत है ।
लेकिन… क्या इसके नुक़सान भी हो सकते हैं?
1. खटास, पाचन और कब्ज़
दही में लैक्टिक एसिड और प्राकृतिक ठंडी तासीर होने के कारण यह कुछ लोगों में पेट फूलना, गैस, कब्ज़ या एसिडिटी पैदा कर सकता है, विशेषकर जब उनका पाचन तंत्र कमजोर हो।
2. एलर्जी या असहिष्णुता
लैक्टोज इनटॉलरेंट लोगों में दही के सेवन से दस्त, पेट दर्द या एलर्जी जैसे लक्षण उभर सकते हैं। कुछ बाजारू दहियों में फ्लेवर या एडिटिव्स शामिल होते हैं, जो त्वचा के रैश या अन्य एलर्जिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकते हैं।
3. अस्थमा, गठिया और सूजन
आयुर्वेद के अनुसार, दही की गर्म तासीर कफ और पित्त में वृद्धि कर सकती है—विशेष रूप से अस्थमा, गठिया या जोड़ों में दर्द की समस्या वाले लोगों के लिए खतरनाक ।
4. वजन बढ़ना
फुल‑फैट या चीनी-मिलाकर बनाए गए दही का ज़्यादा सेवन कैलोरी intake बढ़ा सकता है, जो वजन नियंत्रण में बाधा बनता है।
5. इन्फेक्शन का खतरा
अत्यधिक प्रोबायोटिक सेवन से आंत माइक्रोबायोटा के असंतुलन की संभावना बढ़ जाती है, जिसके चलते सूजन या कार्डियोवैस्कुलर जोखिम भी बढ़ सकता है।
6. किडनी और मस्तिष्क स्वास्थ्य
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि अत्यधिक कैल्शियम से किडनी पथरी का खतरा और मस्तिष्क की गतिविधि पर असामान्य प्रभाव हो सकते हैं।
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