डायबिटीज़ एक ऐसी लाइफस्टाइल बीमारी है, जिसे कंट्रोल करने के लिए दवाइयों के साथ-साथ सही खान-पान और नियमित व्यायाम बेहद ज़रूरी है। डॉक्टर भी अक्सर शुगर पेशेंट्स को रोज़ाना पैदल चलने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या सिर्फ़ वॉकिंग से शुगर लेवल कंट्रोल होता है? आइए जानते हैं—
पैदल चलने और शुगर का कनेक्शन
पैदल चलने से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है। यानी जो ग्लूकोज़ खून में जमा है, वह ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल होने लगता है। इससे ब्लड शुगर लेवल धीरे-धीरे बैलेंस में आने लगता है।
वॉकिंग का सही समय
- भोजन के बाद – खाने के 20–30 मिनट बाद हल्की वॉक ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने से रोकती है।
- सुबह की वॉक – सुबह ताज़ी हवा में पैदल चलना मेटाबॉलिज़्म और हार्ट हेल्थ के लिए भी लाभकारी है।
- शाम को वॉक – दिनभर की थकान दूर करने और शुगर को नियंत्रित रखने के लिए असरदार है।
कितनी देर पैदल चलना ज़रूरी है?
- डायबिटीज पेशेंट्स के लिए रोज़ाना 30–40 मिनट की ब्रिस्क वॉक (तेज़ कदमों से चलना) फायदेमंद माना जाता है।
- इसे दो हिस्सों में भी बांटा जा सकता है – सुबह और शाम 15–20 मिनट।
- शुरुआती मरीज हल्की वॉक से शुरुआत करें और धीरे-धीरे टाइम बढ़ाएं।
वॉकिंग से मिलने वाले अन्य फायदे
- वज़न नियंत्रित रहता है।
- हार्ट और ब्लड प्रेशर ठीक रहता है।
- स्ट्रेस और थकान कम होती है।
- नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
पैदल चलना डायबिटीज़ कंट्रोल करने का एक आसान और प्राकृतिक उपाय है। यह दवाइयों का विकल्प नहीं है, लेकिन नियमित वॉक से शुगर लेवल को बैलेंस करने में ज़रूर मदद मिलती है। इसलिए रोज़ाना इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
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