अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध के दबाव के बीच चीन की अर्थव्यवस्था ने अप्रत्याशित मजबूती का प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून 2025 तिमाही में चीन की GDP ग्रोथ 5.2% रही, जो विश्लेषकों की उम्मीदों से बेहतर है। इससे पहले की तिमाही यानी जनवरी-मार्च में यह दर 5.4% थी। इसके अलावा तिमाही आधार पर 1.1% की वृद्धि भी दर्ज की गई, जो एक रिकॉर्ड स्तर है।
घरेलू निवेश और निर्यात ने संभाली अर्थव्यवस्था
चीन की मजबूती के पीछे फैक्ट्री निर्माण, हाई-स्पीड रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ बड़ा निवेश प्रमुख कारण रहा।
साथ ही अमेरिका के टैरिफ से बचने के लिए चीन ने दक्षिण-पूर्व एशिया के रास्ते अपने प्रोडक्ट्स को अमेरिका और यूरोप में पहुंचाया, जिससे निर्यात पर पड़े असर की भरपाई हो सकी।
सरकारी खर्च और सब्सिडी ने दी रफ्तार
चीन सरकार ने बीते साल से खर्च प्रोत्साहन कार्यक्रम (Stimulus) चलाया, जिसमें लोगों को इलेक्ट्रिक कार, एसी और अन्य सामान खरीदने के लिए सब्सिडी दी गई। इससे मांग में तेजी आई और फैक्ट्रियों को राहत मिली, जो कीमत युद्ध और ओवरकैपेसिटी के कारण घाटे में थीं।
हालांकि कुछ शहरों में इसकी लोकप्रियता से सरकारी बजट पर दबाव भी बढ़ा, लेकिन GDP ग्रोथ बढ़ाने में इस नीति का अहम योगदान रहा।
बाजार को चौंकाने वाला प्रदर्शन
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद चीन का प्रदर्शन वैश्विक उम्मीदों से बेहतर रहा। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने सालभर की GDP ग्रोथ का अनुमान 4.3% से बढ़ाकर 4.7% कर दिया है।
यह तब हुआ जब अमेरिकी टैरिफ अस्थायी रूप से 145% तक पहुंच गए थे और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ा था। लेकिन चीन की अर्थव्यवस्था डगमगाई नहीं बल्कि संभलकर आगे बढ़ी।
डिफ्लेशन की चुनौती से लड़ाई
हालांकि उत्पादों के दाम गिरने लगे हैं — जैसे अपार्टमेंट और इलेक्ट्रिक कारें सस्ती हुई हैं। इससे कंपनियों का मुनाफा घटा और डिफ्लेशन की स्थिति बनी।
डिफ्लेशन का असर आमदनी और कर्ज चुकाने की क्षमता पर पड़ता है। इससे निपटने के लिए चीन ने ब्याज दरों में कटौती की है। सरकारी बॉन्ड की दरें 11 साल के निचले स्तर पर हैं। इससे सस्ते लोन उपलब्ध हुए हैं और निवेश को बढ़ावा मिला है।
खर्च बढ़ाने के प्रयास, पर सीमाएं भी
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार को लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। लेकिन प्रांतीय सरकारों के पास सीमित संसाधन हैं।
इस साल पेंशन में भी औसतन सिर्फ 2% की वृद्धि की गई है, जो जरूरत के मुकाबले बहुत कम है।
आंकड़ों पर उठे सवाल
हालांकि बीजिंग ने 2025 के लिए 5% ग्रोथ का लक्ष्य तय किया है और फिलहाल के आंकड़े इस ओर इशारा कर रहे हैं कि वह इसे हासिल कर सकता है।
लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक ग्रोथ इससे कम, करीब 3.5% हो सकती है। अप्रैल और मई में ग्रोथ 4% से नीचे रही और फैक्टरी निवेश भी धीमा पड़ा है।
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर बना चुनौती
यदि 12 अगस्त तक अमेरिका और चीन के बीच कोई नया व्यापार समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका दोबारा 245% तक के टैरिफ लागू कर सकता है। इससे निर्यात और रोजगार पर बड़ा असर पड़ेगा।
यह भी पढ़ें:
तुलसी विरानी की घर वापसी: स्मृति ईरानी फिर से करेंगी ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में कमबैक
Business Sandesh Indian Newspaper | Articles | Opinion Pieces | Research Studies | Findings & News | Sandesh News