सेहत के प्रति जागरूक लोगों के बीच नाश्ते में दलिया और ओट्स दोनों ही काफी लोकप्रिय हो गए हैं। पर अक्सर सवाल उठता है कि देसी दलिया बेहतर है या इंग्लिश ओट्स? कौन से विकल्प सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा? विशेषज्ञों की सलाह और पोषण तथ्यों के आधार पर हम इस सवाल का जवाब तलाशेंगे और आपकी इस कन्फ्यूजन को दूर करेंगे।
देसी दलिया क्या है?
देसी दलिया, जिसे हिंदी में जौ का दलिया भी कहा जाता है, पारंपरिक रूप से गेहूं या जौ के भूने और कटे हुए दानों से बनाया जाता है। यह भारत में सदियों से उपयोग में है और ठंडे मौसम में इसे पोषक नाश्ते के रूप में खाया जाता है। देसी दलिया में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।
इंग्लिश ओट्स क्या हैं?
इंग्लिश ओट्स, जिन्हें सामान्यत: रोल्ड ओट्स कहा जाता है, खास तौर पर ऑटमील के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये ओट्स, जई के दानों को भाप देकर फ्लैट किया जाता है ताकि पका पाना आसान हो। ओट्स में भी फाइबर, प्रोटीन, और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरमार होती है। यह ग्लूटेन-फ्री होने के कारण भी लोकप्रिय है।
पोषण में क्या अंतर है?
फाइबर: दोनों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन को सुधारता है और दिल की बीमारी से बचाव करता है।
प्रोटीन: देसी दलिया में प्रोटीन की मात्रा थोड़ा अधिक हो सकती है, जो मसल बिल्डिंग के लिए फायदेमंद है।
ग्लाइकैमिक इंडेक्स: ओट्स का ग्लाइकैमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह शुगर कंट्रोल में बेहतर साबित होता है।
विटामिन और मिनरल: दोनों में आयरन, मैग्नीशियम, और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाए जाते हैं, लेकिन देसी दलिया में थोडा प्राकृतिक पोषण अधिक होता है।
स्वाद और पाचन में फर्क
देसी दलिया का स्वाद अधिक रोस्टेड और पारंपरिक होता है, जो कुछ लोगों को ज्यादा पसंद आता है। वहीं, इंग्लिश ओट्स का स्वाद हल्का और न्यूट्रीशियस होता है। पाचन की दृष्टि से दोनों ही अच्छे हैं, पर जो लोग ग्लूटेन से बचना चाहते हैं, उनके लिए ओट्स बेहतर विकल्प है।
कौन किसे चुने?
वजन घटाने वाले: ओट्स का ग्लाइकैमिक इंडेक्स कम होने के कारण बेहतर विकल्प है।
पाचन समस्या वाले: दोनों ही फाइबर से भरपूर हैं, लेकिन देसी दलिया थोड़ा भारी हो सकता है।
डायबिटीज मरीज: कम ग्लाइकैमिक इंडेक्स की वजह से ओट्स ज्यादा लाभदायक।
पारंपरिक स्वाद पसंद करने वाले: देसी दलिया रहेगा पसंदीदा।
विशेषज्ञों का सुझाव
पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों का संयोजन भी फायदेमंद हो सकता है। आप अपने स्वाद और स्वास्थ्य की जरूरत के हिसाब से दोनों में से किसी एक या दोनों का मिश्रण कर सकते हैं। नियमित रूप से खाने के साथ संतुलित आहार और व्यायाम भी जरूरी है।
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