अगरतला (एजेंसी/वार्ता): मार्क्सवादी कमुनिस्ट पार्टी (माकपा) की केंद्रीय समिति ने शुक्रवार को अगले वर्ष फरवरी में होने वाले त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ गठबंधन को मंजूरी दे दी है।
माकपा के राज्य सचिव जितेन्द्र चौधरी ने शुक्रवार को बताया कि माकपा पोलित ब्यूरो ने भी राज्य स्तर पर धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों के साथ समझ बनाने और काम करने को हरी झंडी दी है। उन्होंने कहा, “हमें पहले लोकतंत्र की बहाली, कानून के शासन की आवश्यकता पर एक आम सहमति पर पहुंचना चाहिए, और संविधान और इन मुद्दों पर पूरा विपक्ष एक मंच पर आ जाए और फिर सीटों के बंटवारे पर बात हो सकती है। हम धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ताकतों की एकता के पक्ष में हैं।
चौधरी ने पार्टी को निर्दिष्ट किए बिना कहा कि माकपा एक सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम के आधार पर धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ताकतों के साथ मिलकर लड़ने के लिए तैयार है, और इस दिशा में चर्चा आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) जैसी सांप्रदायिक पार्टी को हराएं, जिसने पिछले पांच वर्षों में त्रिपुरा के लोगों को धोखा दिया है, राज्य को बचाने के लिए सत्ता से बेदखल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा,“ नरेन्द्र मोदी सरकार के आठ वर्ष के शासन में भारत सभी मोर्चों पर पुरानी विकलांगता से पीड़ित रहा है। हर जगह सरकार हेरफेर, निरंकुशता, लोकतांत्रिक संस्थानों पर लगातार हमले, भ्रष्टाचार और कॉरपोरेट संचालित नीतियों को लागू करने से देश को गरीब बनाती है।” उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 के आम चुनावों में, देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक दलों के संयुक्त प्रयास से भाजपा को देश से बाहर कर दिया गया था, जहां वाम मोर्चे की हिस्सेदारी थी।
-एजेंसी/वार्ता
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