थायराइड को आमतौर पर वयस्कों की बीमारी माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों में भी थायराइड हो सकता है? यह स्थिति उनकी शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है।डॉ. के अनुसार, “थायरॉयड हार्मोन बच्चों के मस्तिष्क विकास, ऊंचाई और मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी या अधिकता बच्चों की सेहत को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है।”
बच्चों में थायराइड के मुख्य कारण:
1. जन्मजात थायरॉयड डिसऑर्डर (Congenital Hypothyroidism):
कुछ बच्चों को जन्म से ही थायरॉयड ग्लैंड में समस्या होती है। नवजात स्क्रीनिंग से इसका जल्दी पता लगाया जा सकता है।
2. हाशिमोटो थायरॉयडिटिस (Hashimoto’s Thyroiditis):
यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉयड ग्रंथि पर हमला करती है। यह 6 साल से ऊपर के बच्चों में दिख सकती है।
3. आयोडीन की कमी:
आयोडीन थायरॉयड हार्मोन के निर्माण में जरूरी है। इसकी कमी से हाइपोथायरॉयडिज्म हो सकता है।
4. परिवार में इतिहास:
अगर माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को थायराइड की समस्या रही है, तो बच्चों में इसका जोखिम बढ़ जाता है।
लक्षण जिन पर ध्यान देना चाहिए:
शारीरिक विकास धीमा होना
थकान, सुस्ती, याददाश्त कमजोर होना
त्वचा रूखी और वजन बढ़ना
कब्ज और चेहरे पर सूजन
किशोरों में देर से पीरियड्स आना या अनियमित चक्र
डाइट और बचाव के उपाय:
आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करें
हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, अंडे और नट्स आहार में शामिल करें
फास्ट फूड और ज्यादा शुगर से दूर रखें
नियमित रूप से थायरॉयड की जांच करवाएं (खासकर यदि परिवार में इतिहास हो)
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