भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल) के प्रदेश अध्यक्ष हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने एक बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार अमेरिका के साथ जो मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) करने जा रही है, वह भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
लक्खोवाल का कहना है कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में किसानों को डीजल, खाद, बीज और इंश्योरेंस जैसी भारी सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा वहां के फार्म बड़े होते हैं और खेती में कम लोग लगे होते हैं। इसके विपरीत, भारत में करीब 60 प्रतिशत आबादी खेती और डेयरी से जुड़ी है, जिनमें मजदूरों की संख्या भी बहुत अधिक है।
⚠️ “भारत के किसानों को बर्बादी की ओर ले जा सकता है यह समझौता”
लक्खोवाल ने कहा कि यदि यह FTA लागू हुआ, तो भारतीय किसान विदेशी उत्पादों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
बड़े कॉरपोरेट घराने भारतीय बाजार पर कब्जा कर लेंगे, जिससे देश के छोटे किसान और डेयरी से जुड़े परिवार रोजगार खो बैठेंगे।
इससे बेरोजगारी और ग्रामीण आर्थिक संकट गहराएगा।
🙏 “प्रधानमंत्री से अपील: कृषि और डेयरी सेक्टर को FTA से बाहर रखा जाए”
भारतीय किसान यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्ट मांग की है कि
भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिका के साथ होने वाले इस व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए।
लक्खोवाल ने यह भी जोड़ा कि भारत हर साल दाल, खाद्य तेल और बीज जैसी चीजों के लिए अरबों रुपये का आयात करता है।
अगर सरकार किसानों को सही MSP और फसल खरीद की गारंटी दे दे, तो देश में ही यह उत्पादन किया जा सकता है।
इससे न केवल देश की कृषि बचेगी, बल्कि विदेशों पर खर्च होने वाली पूंजी भी देश के अंदर रहेगी।
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