सावधान! सरसों का तेल बन सकता है हार्ट अटैक की वजह, जानिए सच्चाई

सरसों का तेल दशकों से भारतीय रसोई का अहम हिस्सा रहा है। खासकर उत्तर भारत और पूर्वी भारत में इसे सबसे स्वास्थ्यवर्धक तेलों में से एक माना जाता है। लेकिन हाल के कुछ शोध और चिकित्सकों की राय के अनुसार, सरसों का तेल यदि सीमित मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए, तो यह हृदय रोग, यहां तक कि हार्ट अटैक का कारण भी बन सकता है।

इसलिए जरूरी है कि हम समझें — कब और कैसे सरसों का तेल फायदेमंद होता है, और किन परिस्थितियों में यह नुकसानदेह साबित हो सकता है।

क्या है सरसों के तेल में ऐसा जो चिंता का कारण बन सकता है?

सरसों के तेल में एक यौगिक पाया जाता है जिसे इरूसिक एसिड (Erucic Acid) कहा जाता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, जब यह एसिड अधिक मात्रा में शरीर में जाता है, तो यह हृदय की मांसपेशियों में वसायुक्त जमा (fatty deposits) बढ़ा सकता है, जिससे मायोकार्डियल फाइब्रोसिस नामक स्थिति उत्पन्न हो सकती है — जो आगे चलकर हार्ट फेलियर या अटैक का कारण बन सकती है।

हालांकि, यह प्रभाव केवल अत्यधिक सेवन, खराब गुणवत्ता वाले तेल, या लंबे समय तक लगातार एक ही प्रकार के तेल के उपयोग पर देखा गया है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

दिल्ली के एक प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ के अनुसार:

“सरसों का तेल पूरी तरह खतरनाक नहीं है, लेकिन इसे संतुलित मात्रा में और अन्य हेल्दी तेलों के साथ बदल-बदलकर इस्तेमाल करना बेहतर होता है। एक ही तेल पर सालों तक निर्भर रहना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं।”

क्या सभी सरसों के तेल हानिकारक हैं?

नहीं। बाज़ार में मिलने वाले कई कुंवारी (cold-pressed) और रिफाइंड सरसों तेल में इरूसिक एसिड की मात्रा नियामक सीमा के अंदर होती है। ऐसे तेलों में ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स, और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

मूल समस्या तब आती है जब तेल को बार-बार गर्म किया जाता है, या दीप फ्राइंग के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे उसमें ट्रांस फैट्स और टॉक्सिक कंपाउंड्स बन सकते हैं, जो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकते हैं।

कैसे करें सरसों के तेल से बचाव और सुरक्षित उपयोग?

सिर्फ ब्रांडेड, FSSAI सर्टिफाइड तेल ही इस्तेमाल करें

बार-बार गर्म किया हुआ तेल न खाएं

दीप फ्राई के बजाय उबालना, भूनना या हल्के तड़के तक ही सीमित रखें

एक ही प्रकार के तेल का वर्षों तक उपयोग न करें – ऑयल रोटेशन अपनाएं (जैसे सरसों, जैतून, सूरजमुखी तेल को बदलते रहें)

हृदय रोग के मरीज डॉक्टर की सलाह से ही तेल चुनें

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