सावधान! मामूली स्किन एलर्जी बन सकती है स्किन कैंसर की वजह

अक्सर लोग त्वचा पर होने वाली मामूली खुजली, रैशेज़ या लाल चकत्तों को सामान्य एलर्जी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि बार-बार होने वाली स्किन एलर्जी या लंबे समय तक बनी रहने वाली त्वचा की जलन, त्वचा के कैंसर (Skin Cancer) के जोखिम को बढ़ा सकती है?

हाल ही में कई चिकित्सीय अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि क्रॉनिक स्किन इंफ्लेमेशन (दीर्घकालिक सूजन) और एलर्जी संबंधी त्वचा विकार, कुछ मामलों में कैंसर के शुरुआती लक्षण या जोखिम कारक बन सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग त्वचा से जुड़े किसी भी परिवर्तन को मामूली न समझें और समय रहते चिकित्सा सलाह लें।

कैसे जुड़ी हैं एलर्जी और स्किन कैंसर?

एलर्जी के कारण त्वचा पर अक्सर सूजन, जलन, खुजली और लालिमा जैसे लक्षण दिखते हैं। जब ये लक्षण बार-बार होते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं, तो त्वचा की कोशिकाओं में DNA डैमेज हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप कुछ मामलों में असामान्य सेल ग्रोथ शुरू हो सकती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, एक्जिमा, या सोरायसिस जैसी पुरानी स्किन स्थितियों के मरीजों को भविष्य में त्वचा के कैंसर का खतरा थोड़ा अधिक हो सकता है, खासकर अगर वे धूप में ज़्यादा समय बिताते हैं।

किन लक्षणों पर सतर्क होना ज़रूरी है?

घाव जो लंबे समय तक न भरें
अगर त्वचा पर कोई चोट या एलर्जी वाली जगह महीनों तक ठीक न हो, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।

त्वचा का रंग या बनावट बदलना
त्वचा का असमान रूप से काला, गुलाबी या चमकदार होना।

मस्से या तिल का आकार बदलना
किसी पुराने तिल का आकार, रंग या किनारे बदलना या उसमें से खून आना।

अत्यधिक खुजली और जलन
अगर त्वचा की खुजली सामान्य दवाओं से शांत न हो और जगह-जगह चकत्ते बने रहें।

कौन लोग हैं हाई रिस्क पर?

जिनकी त्वचा बहुत संवेदनशील होती है

जो लंबे समय से किसी स्किन एलर्जी या रोग से पीड़ित हैं

जो ज़्यादा समय धूप में बिताते हैं

जिनके परिवार में स्किन कैंसर का इतिहास रहा हो

इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर, जैसे कि कैंसर थेरेपी के दौरान

क्या करना चाहिए?

त्वचा में किसी भी असामान्य बदलाव पर तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें

सनस्क्रीन का नियमित प्रयोग करें (कम से कम SPF 30)

स्किन एलर्जी या इंफ्लेमेशन को लंबे समय तक यूं ही न छोड़ें

घरेलू नुस्खों के बजाय सही चिकित्सकीय इलाज लें

हर 6–12 महीने में स्किन चेकअप करवाएं, विशेषकर यदि आप हाई-रिस्क कैटेगरी में हैं

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