राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर को BCCI का कारण बताओ नोटिस, 48 घंटे का अल्टीमेटम

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने राजस्थान रॉयल्स टीम के मैनेजर रोमी भिंडर को एक औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस तब दिया गया जब 10 अप्रैल को गुवाहाटी में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ RR के IPL 2026 मैच के दौरान उन्हें टीम के डगआउट में मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करते हुए देखा गया।

यह घटना बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स की पारी के 11वें ओवर में हुई। ब्रॉडकास्ट फुटेज में भिंडर अपने डिवाइस पर कुछ करते हुए दिखे, और उनके बगल में 15 साल के उभरते हुए बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी बैठे थे, जो स्क्रीन की तरफ देख रहे थे। BCCI की भ्रष्टाचार-रोधी और सुरक्षा इकाई (ACSU) ने रविवार को यह नोटिस जारी किया, जिसमें भिंडर को अपने कार्यों का स्पष्टीकरण देने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है। मामले की जांच चल रही है, जिसमें वीडियो सबूतों की समीक्षा की जा रही है।

IPL का खिलाड़ी और मैच अधिकारी क्षेत्र (PMOA) प्रोटोकॉल 2026 डगआउट में मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाता है। हालांकि टीम मैनेजर अपने डिवाइस अपने साथ रख सकते हैं और ड्रेसिंग रूम में क्रिकेट से जुड़े या आपातकालीन उद्देश्यों के लिए उनका इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन खेलने के क्षेत्र (playing enclosure) में उनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, सिवाय नामित विश्लेषक (analyst) के।

इस मामले में अब एक मेडिकल इमरजेंसी (चिकित्सीय आपातकाल) का पहलू भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, भिंडर को अतीत में एक जानलेवा स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा था, जब उनके दोनों फेफड़े काम करना बंद कर गए थे; उस समय उन्हें लगभग एक सप्ताह तक वेंटिलेटर पर और नागपुर के अस्पताल में लगभग एक महीने तक भर्ती रहना पड़ा था। वह अस्थमा (दमा) से भी पीड़ित हैं और उनका वज़न काफी कम हो गया है, जिसके कारण उनके लिए बार-बार ड्रेसिंग रूम तक आना-जाना काफी मुश्किल हो जाता है। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने सीज़न शुरू होने से पहले ही BCCI को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में सूचित कर दिया था, और वह एहतियात के तौर पर अपने साथ फ़ोन रखते हैं।

भिंडर 2008 में IPL के पहले सीज़न से ही राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़े हुए हैं और उन्होंने टीम के बैकग्राउंड स्टाफ में विभिन्न भूमिकाएं निभाई हैं। इस फ़्रैंचाइज़ी ने IPL 2026 में ज़ोरदार शुरुआत की है।

यह मामला मैच-फ़िक्सिंग के किसी भी संभावित जोखिम को रोकने के लिए प्रोटोकॉल के पालन पर BCCI के कड़े रुख को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर यह सख़्त दिशा-निर्देशों के दायरे में वास्तविक चिकित्सीय ज़रूरतों को पूरा करने के संबंध में भी सवाल खड़े करता है। आगे की कार्रवाई भिंडर की प्रतिक्रिया और जाँच के नतीजों पर निर्भर करेगी।