स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के दौर में लोग अब सफेद नमक की जगह काला नमक या हिमालयन पिंक नमक को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। इन दोनों विकल्पों को ज्यादा हेल्दी माना जाता है क्योंकि इनमें प्राकृतिक मिनरल्स पाए जाते हैं और यह प्रोसेस्ड नहीं होते। लेकिन अगर आप पूरी तरह से सफेद नमक छोड़कर सिर्फ काला या पिंक नमक का सेवन कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि यह आदत आपके शरीर में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।
क्यों जरूरी है आयोडीन युक्त नमक?
भारत जैसे देश में आयोडीन की कमी एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या रही है। इसी वजह से सरकार ने आयोडीन युक्त नमक को अनिवार्य किया। आयोडीन शरीर के लिए एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो मुख्य रूप से थायरॉइड ग्रंथि को ठीक से काम करने में मदद करता है।
काला या पिंक नमक में आयोडीन की मात्रा या तो बहुत कम होती है या नहीं होती, जिससे इनका लंबे समय तक सेवन शरीर में आयोडीन की कमी पैदा कर सकता है।
सिर्फ काला या पिंक नमक खाने से हो सकती हैं ये बीमारियां:
ग्वॉयटर (घेंघा): आयोडीन की कमी से थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आ सकती है, जिससे गले के पास सूजन आ जाती है।
हाइपोथायरॉइडिज्म: थकान, वजन बढ़ना, त्वचा का रूखापन, डिप्रेशन और मासिक धर्म में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मानसिक विकास में बाधा: बच्चों में आयोडीन की कमी से मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है और सीखने की क्षमता कम हो जाती है।
गर्भावस्था में जटिलताएं: आयोडीन की कमी गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकती है, जिससे गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ सकता है।
क्या है समाधान?
काला या पिंक नमक का इस्तेमाल सप्लीमेंट या स्वाद बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
लेकिन मुख्य नमक के तौर पर आयोडीन युक्त सफेद नमक का ही प्रयोग करें।
बैलेंस डाइट का पालन करें और ब्लाइंड हेल्थ ट्रेंड्स से बचें।
यह भी पढ़ें:
संजय कपूर की मौत पर मां रानी कपूर ने जताया संदेह, उठाए कई गंभीर सवाल
Business Sandesh Indian Newspaper | Articles | Opinion Pieces | Research Studies | Findings & News | Sandesh News