भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से हाल में की गई रेपो रेट कटौती को लेकर पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने साफ कहा है कि यह फैसला निवेश को तुरंत प्रोत्साहित नहीं करेगा। उनका मानना है कि महज ब्याज दर घटाने से निवेश का माहौल नहीं बनता, इसके लिए व्यापक आर्थिक सुधार, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा जैसे कारकों की भी अहम भूमिका होती है।
राजन ने सोमवार को कहा, “रेपो रेट में कटौती कोई ‘जादुई गोली’ नहीं है, जिससे तुरंत निवेश बढ़ जाएगा। पहले ऊंची ब्याज दरों का तर्क था, लेकिन अब दरें काफी हद तक संतुलित हैं।”
गौरतलब है कि फरवरी से लेकर जून तक RBI ने कुल 1% की रेपो रेट कटौती की है। मौद्रिक नीति समिति ने 6 जून को ही 0.5% की कटौती की थी और नीति रुख को ‘उदार’ से ‘तटस्थ’ किया था। इसका मतलब है कि फिलहाल RBI और कटौती या वृद्धि की तरफ नहीं झुकेगा।
राजन ने कहा कि कंपनियों को निवेश के लिए प्रेरित करने में नीतिगत स्थिरता, पारदर्शिता और बाजार में प्रतिस्पर्धा बड़ी भूमिका निभाती है। वे सिर्फ सस्ते कर्ज की वजह से निवेश नहीं करतीं, बल्कि उन्हें भविष्य में फायदा दिखना चाहिए।
प्राइवेट सेक्टर का निवेश 11 साल के निचले स्तर पर
हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में निजी निवेश की हिस्सेदारी 11 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। इसका मुख्य कारण है—कंपनियों की बढ़ती सतर्कता और अनिश्चित बाजार परिस्थितियां। राजन ने कहा, “वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से भारतीय कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि पहले निम्न वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर खर्च की चिंता थी, लेकिन अब उच्च मध्यम वर्ग भी खर्च करने से बच रहा है, जो कि चिंता का विषय है।
महंगाई नियंत्रण में, लेकिन कोर इनफ्लेशन पर नजर जरूरी
राजन ने CPI आधारित महंगाई दर के 2.1% पर आने को ‘संतोषजनक स्थिति’ बताया, लेकिन कहा कि कोर इनफ्लेशन (जिसमें खाद्य और ऊर्जा को छोड़ दिया जाता है) पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए।
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