डायबिटीज केवल ब्लड शुगर की बीमारी नहीं है, यह पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है, खासकर दिल को। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में हार्ट डिजीज का खतरा पुरुषों की तुलना में दोगुना तक हो सकता है। डॉ. बताती हैं, “डायबिटीज महिलाओं के दिल की धमनियों पर धीरे-धीरे असर डालती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट अटैक का जोखिम काफी बढ़ जाता है।”
क्यों ज्यादा खतरे में हैं महिलाएं?
हार्मोनल बदलाव:
रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन लेवल कम हो जाता है, जो दिल को सुरक्षा देने वाले हार्मोन में से एक है। डायबिटीज के साथ मिलकर यह हार्ट डिजीज के रिस्क को और बढ़ा देता है।
साइलेंट सिम्प्टम्स:
महिलाओं में हार्ट अटैक या ब्लॉकेज के लक्षण पुरुषों की तुलना में कम स्पष्ट होते हैं, जैसे—थकावट, सांस फूलना, पीठ दर्द। ये अक्सर डायबिटीज के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं और नजरअंदाज हो जाते हैं।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन:
टाइप 2 डायबिटीज में अक्सर शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाता है, जिससे क्रॉनिक इंफ्लेमेशन बढ़ती है। यह दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है।
बचाव के उपाय क्या हैं?
ब्लड शुगर, BP और कोलेस्ट्रॉल को नियमित जांचें
प्रोसेस्ड और तली-भुनी चीजें कम खाएं
30 मिनट की रोजाना वॉक और व्यायाम करें
धूम्रपान और शराब से बचें
तनाव और नींद की गुणवत्ता पर ध्यान दें
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