बारिश में जुकाम-खांसी से परेशान? अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय और बचाव के तरीके

बरसात के मौसम में भीगना भले ही रोमांटिक लगे, लेकिन ये मौसम साथ लाता है नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द और कभी-कभी हल्का बुखार जैसी समस्याएं। यह सब आमतौर पर वायरल इंफेक्शन का हिस्सा होता है, जो वातावरण में नमी बढ़ने से तेजी से फैलता है।

बारिश में इम्यूनिटी कमजोर पड़ने से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर शरीर वाले लोगों को जुकाम-खांसी जल्दी पकड़ लेती है। खासकर जब मौसम अचानक गर्मी से ठंडक की ओर मुड़ता है, तब शरीर का तापमान गड़बड़ा जाता है और वायरल इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है।

क्यों बढ़ती है बरसात में वायरल इंफेक्शन की संभावना?
वातावरण में नमी वायरस और बैक्टीरिया के लिए आदर्श स्थिति बनाती है

गीले कपड़े या बारिश में भीगने से शरीर का तापमान गिरता है

ठंडी हवा और बंद कमरे संक्रमण को फैलने में मदद करते हैं

लोग घर के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे वायरस आसानी से एक-दूसरे में फैलता है

बरसात में होने वाले सामान्य लक्षण:
लगातार छींक आना

गले में खराश और दर्द

नाक बहना या बंद हो जाना

हल्का बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द

थकान और कमजोरी महसूस होना

आयुर्वेद के ये उपाय देंगे राहत और बचाएंगे संक्रमण से:
हल्दी वाला गर्म दूध
– रात में पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है और गले को आराम मिलता है

तुलसी-अदरक-मुलेठी का काढ़ा
– दिन में 2 बार पीने से गले की सूजन और कफ में राहत

शहद + अदरक का रस
– एक चम्मच शहद में 3-4 बूंद अदरक मिलाकर लेने से खांसी में तुरंत आराम

स्टीम लेना (भांप)
– गर्म पानी में अजवाइन या नीलगिरी का तेल डालकर भांप लें – गले और नाक के लिए असरदार

त्रिकटु चूर्ण (सौंठ, काली मिर्च, पिपली)
– 1 चुटकी चूर्ण को शहद के साथ दिन में एक बार लें – कफ कम करने में मददगार

सावधानियां जो रखें सेहत का ख्याल:
भीगने से बचें, कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को गर्म रखें

ठंडी, तली-भुनी और मीठी चीजें खाने से परहेज करें

गुनगुने पानी से दिन में दो बार गरारे करें

घर में नमी और सीलन न बनने दें, कमरे को साफ-सुथरा और हवादार रखें

नींद पूरी लें और तनाव से दूर रहें – ये आपकी इम्यूनिटी को मजबूत बनाएंगे

पब्लिक प्लेस में मास्क जरूर पहनें और हाथों की सफाई पर ध्यान दें

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