14 जुलाई 2025 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात कर कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। इस बातचीत में सीमा विवाद, व्यापार में रुकावटें और द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने जैसे गंभीर विषयों पर फोकस रहा।
जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन संबंधों को सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए यह जरूरी है कि मतभेदों को विवाद का रूप न लेने दिया जाए और प्रतिस्पर्धा को टकराव में तब्दील न किया जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रिश्ते तभी टिक सकते हैं जब पारस्परिक सम्मान, हित और संवेदनशीलता को आधार बनाया जाए।
मुख्य बिंदु जिन पर हुई चर्चा:
1. प्रतिबंधात्मक व्यापार उपायों पर चिंता
जयशंकर ने चीन के ‘प्रशासनिक व्यापार अवरोधों’ और विशेषकर महत्वपूर्ण खनिजों और उर्वरकों के निर्यात में रुकावटों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने वांग से आग्रह किया कि इन अवरोधों को हटाकर दोनों देशों के बीच व्यापार को सहज बनाया जाए।
“सीमा पर तनाव और वहां शांति बनाए रखने की हमारी क्षमता, दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास का आधार बन सकती है,” — एस. जयशंकर
2. लोगों के बीच संपर्क सामान्य बनाना आवश्यक
जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन के नागरिकों के बीच संपर्क को फिर से सामान्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को मजबूती मिलेगी।
3. मतभेद नहीं, समाधान चाहिए
जयशंकर ने दोहराया कि भारत और चीन पहले ही इस बात पर सहमत हो चुके हैं कि कोई भी मतभेद विवाद में नहीं बदलना चाहिए, और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष बनने से रोकना चाहिए। दोनों पक्षों को अब रचनात्मक और दूरदर्शी नजरिया अपनाना होगा।
4. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रणनीतिक संवाद को बढ़ावा
दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में नियमित संवाद और आपसी यात्राएं रिश्तों को और बेहतर बना सकती हैं। उन्होंने 5 साल बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने की सराहना की और राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का जिक्र किया।
5. सीमा पर शांति के महत्व पर सहमति
भारत-चीन सीमा यानी LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर शांति और सौहार्द बनाए रखने को लेकर भी बातचीत हुई। जयशंकर ने कहा कि सीमा पर स्थायित्व दोनों देशों के संपूर्ण द्विपक्षीय रिश्तों की प्रगति के लिए जरूरी है।
6. वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण
दोनों देशों ने साझा हित वाले अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की सफल अध्यक्षता के लिए चीन को बधाई दी और भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
इसके अलावा जयशंकर ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री लियू जियानचाओ और उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। इससे कुछ सप्ताह पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी SCO सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा कर चुके हैं।
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