एक समय था जब मध्यप्रदेश के सतना जिले के शंकर नगर में रहने वाले प्रभात त्रिपाठी नौकरी की तलाश में भटकते थे। लेकिन आज वही प्रभात अपनी स्ट्रॉबेरी फार्मिंग से हजारों दिलों को जीत रहे हैं और सालाना 30 से 35 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।
15 साल की नौकरी छोड़ी, खेती को बनाया सपना
प्रभात ने देश की कई कृषि कंपनियों में 15 वर्षों तक काम किया। नौकरी के दौरान ही उन्होंने खेती की बारीकियों, बाजार की मांग और तकनीकों को बारीकी से समझा।
साल 2023 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया — नौकरी छोड़ दी और अपने खेतों की ओर लौटे।
विदेशी स्वाद, देसी जमीन – 6 वैरायटी से गूंथी सफलता
प्रभात ने महज डेढ़ एकड़ जमीन से शुरुआत की।
उन्होंने अपनी फार्म में 6 विदेशी किस्मों की स्ट्रॉबेरी उगाना शुरू किया:
विंटर डॉन
स्वीट सेंसेशन
पामरिटास
ब्रिलियंस
फॉर्चुना
नबीला
ये किस्में कुछ ही हफ्तों में फल देने लगती हैं और 5 महीने तक उत्पादन देती हैं। सतना की बलुई दोमट मिट्टी में ये बेहद स्वादिष्ट और भरपूर उत्पादन देने वाली साबित हुईं।
किराए की जमीन से शुरू, अब ओडिशा तक डिमांड
प्रभात ने आगे बढ़ने के लिए 5 एकड़ जमीन किराए पर ली और खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शुरू किया।
आज उनकी स्ट्रॉबेरी न केवल सतना बल्कि ओडिशा तक भेजी जाती है।
उनके फार्म से रोज़ाना 300 किलो तक स्ट्रॉबेरी की पैदावार होती है।
खेती से जोड़ा एग्रो-टूरिज्म, बना नया आकर्षण
प्रभात ने अपनी फार्मिंग को सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे एक एग्रो टूरिज्म हब बना दिया, जहाँ लोग खुद स्ट्रॉबेरी तोड़कर खाने और खरीदने आते हैं।
सतना का यह फार्म आज महाबलेश्वर जैसी टूरिज्म जगहों को टक्कर दे रहा है।
प्रेरणा बन रहे हैं नए किसानों के लिए
प्रभात अब खुद बीज उत्पादन भी कर रहे हैं और अन्य किसानों को उन्नत किस्में अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
उनकी सोच ने यह साबित कर दिया है कि खेती अब सिर्फ गुज़ारे का साधन नहीं, बल्कि उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का सशक्त जरिया बन चुकी है।
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