एक्टर से उद्यमी तक: विवेक ओबेरॉय का प्रेरणादायक ‘सेकेंड एक्ट’

TV9 भारतवर्ष के न्यूज़ 9 ग्लोबल समिट 2025 में बॉलीवुड अभिनेता और सफल उद्यमी विवेक ओबेरॉय ने अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। इस आयोजन की थीम थी: “भारत-यूएई: समृद्धि और प्रगति के लिए साझेदारी”।

19 जून 2025 को दुबई के ताज होटल में हुए इस कार्यक्रम के खास सेगमेंट ‘सेकेंड एक्ट’ में विवेक ने टेड-स्टाइल बातचीत के दौरान न केवल अपने करियर के उतार-चढ़ाव पर बात की, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने, खुद को फिर से गढ़ने और सफलता के मंत्र भी साझा किए।

🌀 सेकेंड एक्ट क्या है और ये जरूरी क्यों है?
विवेक ने कहा कि वह इस समिट में ‘सेकेंड एक्ट’ की बात करने खासतौर पर आए हैं, क्योंकि यही ज़िंदगी का असली और फाइनल एक्ट होता है।

उन्होंने दो अहम सवाल उठाए:

आप आज क्या हैं?

आप भविष्य में क्या बनना चाहते हैं?

विवेक के मुताबिक, दूसरा सवाल ज्यादा अहम है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा,

“आप क्या हैं, वो आपकी पहचान हो सकती है, लेकिन आप क्या बनना चाहते हैं, वही आपकी नियति तय करता है।”

🔄 समय के साथ खुद को बदलना है जरूरी
विवेक ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने आप को समय के साथ अपडेट और रीडिफाइन करना चाहिए।

“जो कभी स्टाइल स्टेटमेंट हुआ करता था, वही चीज़ बाद में अगली पीढ़ी के लिए मज़ाक बन जाती है। इसलिए बदलाव ज़रूरी है। मैंने कई ऐसे एक्टर्स देखे हैं जिन्हें दशकों तक सराहा गया, क्योंकि उन्होंने खुद को समय के साथ बदला।”

😓 जब खुद का ‘विवेक’ भी काम नहीं करता था…
विवेक ने खुलासा किया कि उन्होंने भी कई बार असफलता का सामना किया, और उस वक्त “मेरा खुद का विवेक भी काम करना बंद कर चुका था।”

“मैं अपनी ही सोच को नहीं सुनता था। लेकिन एक वक्त आया जब मैंने खुद को दोबारा समझा, वैल्यूएट किया।”

विवेक ने बताया कि आज वे दुनिया भर में 30 से अधिक बिजनेस वेंचर्स से जुड़े हैं और 12 कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं। पर उनके अनुसार,

“सबसे ज़रूरी है ‘इंटेंट’ यानी आपकी नीयत।”

💡 प्रॉमिस से नहीं, रिज़ल्ट्स से बनती है पहचान
विवेक ने कहा कि असली इंसान वही होता है, जो घर पर सबसे आरामदायक और नेचुरल होता है, जब कोई देख नहीं रहा होता।

“मैं वादों पर नहीं, परिणामों पर यकीन करता हूं। लोगों ने मेरी ‘वैल्यू’ तय कर दी थी, लेकिन जब मेरे काम के नतीजे आने लगे, तो मेरी वैल्यू अपने आप बढ़ गई।”

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि:

खुद को समझें,

नीयत सही रखें,

और हर बार खुद को एक बेहतर संस्करण में ढालें।

यह भी पढ़ें:

पानी ज़रूरी है, लेकिन ज़्यादा पानी ज़हर भी बन सकता है! जानिए कैसे बचें ‘वॉटर टॉक्सिसिटी’ से