फिल्मी दुनिया में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनकी निर्माण प्रक्रिया अपने आप में एक कहानी बन जाती है। ऐसी ही एक फिल्म है 1960 में रिलीज़ हुई ‘मुग़ल-ए-आज़म’, जिसे बनाने में 16 साल का समय लगा। आइए जानते हैं इस फिल्म के निर्माण से जुड़ी कुछ दिलचस्प और अनसुनी बातें।
🎬 ‘मुग़ल-ए-आज़म’ का निर्माण: एक दीर्घकालिक प्रयास
‘मुग़ल-ए-आज़म’ की कहानी 1944 में शुरू हुई, जब निर्देशक के. आसिफ ने इम्तियाज़ अली ताज के नाटक ‘अनारकली’ को पढ़ा। फिल्म की शूटिंग 1950 के दशक के प्रारंभ में शुरू हुई, लेकिन विभिन्न कारणों से निर्माण में देरी होती रही। कभी वित्तीय संकट, कभी कलाकारों की समस्याएं, तो कभी तकनीकी चुनौतियाँ, इन सभी ने फिल्म के निर्माण को प्रभावित किया। हालांकि, के. आसिफ की दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण ने इस फिल्म को संभव बनाया।
🏰 भव्य सेट और सजावट
फिल्म के सेट, विशेषकर ‘शीश महल’, अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। इस सेट को बनाने में दो साल का समय और ₹15 लाख की लागत आई, जो उस समय किसी पूरी फिल्म के बजट से भी अधिक था। इस महल में बेल्जियम से आयातित शीशे और असली सोने की मूर्तियाँ लगाई गई थीं।
🎶 ‘प्यार किया तो डरना क्या’ गीत की शूटिंग
फिल्म का प्रसिद्ध गीत ‘प्यार किया तो डरना क्या’ की शूटिंग भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। इस गीत की शूटिंग के लिए विशेष रूप से एक सेट तैयार किया गया था, जिसमें हजारों शीशे लगाए गए थे। शूटिंग के दौरान प्रकाश की समस्या आई, जिसे हल करने के लिए कैमरे के लेंस पर एक पतली परत की मोम लगाई गई, जिससे प्रकाश की परावृत्ति कम हुई।
🎭 कलाकारों का समर्पण
फिल्म के प्रमुख कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों में जान डालने के लिए विशेष प्रयास किए। प्रथमिराज कपूर (अकबर) ने एक दृश्य के लिए 19 रिटेक किए, जबकि दिलीप कुमार (सलिम) और मधुबाला (अनारकली) की केमिस्ट्री ने फिल्म को और भी प्रभावशाली बना दिया।
💰 बजट और बॉक्स ऑफिस सफलता
‘मुग़ल-ए-आज़म’ उस समय की सबसे महंगी भारतीय फिल्म थी, जिसका बजट ₹1.5 करोड़ था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹11 करोड़ की कमाई की, जो उस समय एक रिकॉर्ड था। यह फिल्म 15 वर्षों तक भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी रही।
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