अक्सर ऐसा देखा गया है कि महिलाओं में यूरिक एसिड की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखने को मिलती है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जिनमें हार्मोनल बदलाव, पाचन की गड़बड़ी, और जीवनशैली से जुड़ी आदतें प्रमुख हैं। आइए जानें कि आखिर किन वजहों से महिलाओं में यूरिक एसिड असंतुलन की समस्या ज़्यादा देखने को मिलती है:
1. पीरियड्स और हार्मोनल बदलाव का असर
महिलाओं के शरीर में हार्मोन लगातार उतार-चढ़ाव में रहते हैं, खासतौर पर पीरियड्स के दौरान। प्रीमेनोपॉज़ल महिलाओं में इस समय यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है, क्योंकि सेक्स हार्मोन जैसे एस्ट्रोजेन, यूरिक एसिड के नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर यह समस्या बार-बार हो, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
2. कमजोर पाचन और मेटाबोलिज्म
जब शरीर प्रोटीन या प्यूरिन को सही तरीके से पचा नहीं पाता, तो यूरिक एसिड बनने लगता है। महिलाओं में कमजोर मेटाबोलिज्म या डाइजेस्टिव एंजाइम्स की कमी इसकी मुख्य वजह हो सकती है। खासकर अगर डायबिटीज, फैटी लिवर या किडनी संबंधी समस्या हो, तो यूरिक एसिड का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।
3. उपवास और डाइजेस्टिव सिस्टम पर असर
महिलाएं धार्मिक उपवास अधिक करती हैं, जिससे शरीर लंबे समय तक बिना भोजन के रहता है। इससे डाइजेस्टिव एंजाइम्स की क्रियाशीलता घटती है, और प्रोटीन पचाना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन, शरीर में यूरिक एसिड जमा होने लगता है।
4. मेनोपॉज के बाद की स्थिति
मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन की मात्रा कम हो जाती है। यह हार्मोन यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। जब इसकी मात्रा घटती है, तो शरीर में यूरिक एसिड रुकने लगता है, जिससे समस्या बढ़ जाती है।
क्या करें महिलाएं?
नियमित जांच कराएं
पानी भरपूर पीएं
प्यूरिन युक्त आहार (जैसे दालें, मांस, बीयर) कम करें
संतुलित डाइट लें
डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लें
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