हल्दी, भारतीय रसोई का एक आम मसाला है — इसे हम स्वाद बढ़ाने, रंग लाने और दवा के रूप में सदियों से इस्तेमाल करते आए हैं। लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी ने हल्दी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है।
भारत, पाकिस्तान और नेपाल में बेची जा रही हल्दी के कई सैंपल में लेड (सीसा) की मात्रा खतरनाक स्तर तक पाई गई है। यह वही लेड है जो शरीर में धीरे-धीरे जमा होकर दिमाग, हड्डियों और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
🔬 रिसर्च में क्या निकला?
साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट नामक जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार,
भारत के पटना में पाए गए हल्दी सैंपल में लेड की मात्रा 2,274 माइक्रोग्राम/ग्राम,
जबकि गुवाहाटी में यह 127 माइक्रोग्राम/ग्राम थी।
यह मात्रा FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) द्वारा तय सीमा (10 माइक्रोग्राम/ग्राम) से कई गुना ज्यादा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लेड की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं मानी जाती।
🧪 लेड क्या है और क्यों खतरनाक है?
लेड एक भारी धातु है, जो शरीर में जाकर कैल्शियम की तरह हड्डियों में जमा हो जाती है।
यह ब्रेन, हार्ट, मेटाबोलिज्म और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है।
बच्चों में इसका असर ज्यादा खतरनाक होता है – जैसे कि फोकस की कमी, सीखने में दिक्कत और दिमागी विकास पर असर।
🟡 हल्दी में लेड कैसे मिल जाता है?
रिसर्च में पाया गया कि कुछ व्यापारी हल्दी का रंग चमकदार पीला दिखाने के लिए उसमें लेड क्रोमेट नामक जहरीले रसायन का इस्तेमाल करते हैं।
यह मिलावट हल्दी को ज्यादा आकर्षक बनाती है, लेकिन सेहत के लिए ज़हर होती है।
लेड क्रोमेट के कारण बढ़ते हैं:
न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
किडनी फेल्योर का खतरा
हड्डियों की कमजोरी
✅ FSSAI क्या कहता है?
FSSAI के अनुसार, हल्दी में लेड, लेड क्रोमेट, स्टार्च या कोई भी अन्य रंग नहीं होना चाहिए।
साबुत और पिसी हल्दी, दोनों में लेड की अधिकतम सीमा 10 माइक्रोग्राम/ग्राम तय की गई है।
🛡️ आप क्या कर सकते हैं?
ब्रांडेड और प्रमाणित हल्दी ही खरीदें।
लोकल या अनपैक्ड हल्दी लेने से बचें, खासकर बहुत ज्यादा चटक रंग वाली।
अगर शक हो तो हल्दी को लैब टेस्ट के लिए भेजा जा सकता है।
ज्यादा हल्दी का सेवन करने से पहले इसकी स्रोत और गुणवत्ता की जांच करें।
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