पुष्पा के एक्टर अल्लू अर्जुन का हर किरदार अपनी खास बॉडी लैंग्वेज और तेवर के लिए जाना जाता है। उनका फेमस डायलॉग ‘झुकेगा नहीं स्साला…’ और गले के नीचे हथेली लहराने का अंदाज वाकई चर्चा में रहा। ये सभी चीजें उन्होंने अपने डायरेक्टर सुकुमार से सीखी हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या वह पर्दे पर जो कड़क और सख्त किरदार निभाते हैं, क्या उनकी असल जिंदगी भी वैसी ही है? आइए जानते हैं।
पुष्पा की सुपर सफलता के बाद अल्लू अर्जुन की शोहरत शिखर पर पहुंची।
किसी भी स्टार के लिए यह समय घमंड में जीने का हो सकता था, लेकिन अल्लू अर्जुन की पर्सनालिटी में कहीं से भी अहंकार नजर नहीं आता। “सबका साथ, सबका सम्मान” उनकी जीवनशैली का आदर्श है। वेव्स समिट 2025 में अल्लू अर्जुन ने जिस तरह से सवालों का जवाब दिया और अपने दिल की बात रखी, उसने उन्हें एक बड़े दिल वाला कलाकार बना दिया।
अल्लू अर्जुन की पर्सनलिटी के पहलू
टीवी9 के सीईओ और एमडी बरुण दास से खास बातचीत के दौरान अल्लू अर्जुन की पर्सनलिटी के कई पहलू सामने आए। जब उनसे पूछा गया कि 10वीं फिल्म की शूटिंग के दौरान हुए एक्सीडेंट से उन्होंने खुद को कैसे उबारा, तो उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत कठिन समय था। यह मेरे जीवन का डरावना पल था। लेकिन दर्शकों की दुआ से ही मैं फिर से उनके बीच आ सका।”
अल्लू अर्जुन ने बताया कि दर्शकों के प्यार ने उन्हें वह सफलता दिलाई, जिससे वह तेलुगू सिनेमा के पहले अभिनेता बने, जिन्होंने नेशनल अवॉर्ड जीता। वह कहते हैं, “दुर्घटना शायद मेरे जीवन में एक उपहार लेकर आई। अगर एक्सीडेंट नहीं होता, तो मुझे नेशनल अवॉर्ड नहीं मिलता।” उन्होंने अपनी सफलता और सेहत का सारा श्रेय अपने प्रशंसकों को दिया, जो उनके लिए एक आशीर्वाद की तरह हैं।
आम दर्शकों का योगदान भी अहम
अल्लू अर्जुन ने इस दौरान आम लोगों के योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा, “मैंने एक मंत्र साध लिया है, जो है – अच्छी सलाह किसी से भी मिल सकती है, वह चाहे छोटा हो या बड़ा। हर किसी का सुझाव सुना जाना चाहिए, मानना या न मानना हमारे ऊपर निर्भर है।” वह मानते हैं कि सेट पर तकनीशियन, लाइट ब्वॉय, कॉस्ट्यूम डिजाइनर या कोरियोग्राफर से भी अच्छे सुझाव आ सकते हैं और हमें किसी की अवहेलना नहीं करनी चाहिए।
“मैं एक सेल्फ मेड एक्टर नहीं हूं”
अल्लू अर्जुन ने कहा, “मुझे अपने जीवन में बहुत से लोगों का आशीर्वाद मिला है। मैं एक सेल्फ मेड एक्टर नहीं हूं। मेरा खानदान हमारी बड़ी पहचान है। मेरे दादा जी ने हजारों फिल्मों में काम किया, पिताजी ने साठ-सत्तर फिल्में बनाई और चाचा मेगास्टार हैं। मैं उन सभी का शुक्रगुजार हूं। मैं एक एक्टर हूं क्योंकि मुझे बहुत से लोगों का सहयोग मिला है।” उन्होंने कहा कि वह बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्हें अपने खानदान का सहयोग मिला, लेकिन अब वह आगे अपने निर्देशक, दर्शकों, निर्माताओं, तकनीशियनों और परिवार के सहयोग से ही सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचना चाहते हैं।
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