भारतीय रुपये में लगातार तीसरे दिन बढ़त देखने को मिली है, जिससे यह डॉलर के मुकाबले और मजबूत हो रहा है। दूसरी ओर, डॉलर इंडेक्स पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी की चमक फीकी पड़ गई है।
तीन कारोबारी सत्रों में ही रुपये में 0.77% यानी 67 पैसे की मजबूती दर्ज की गई है। रुपये में आई इस मजबूती का प्रमुख कारण भारत के मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा हैं, साथ ही डॉलर में लगातार गिरावट भी रुपये को सपोर्ट दे रही है।
रुपया पहुंचा नए स्तर पर
👉 मंगलवार को रुपया 26 पैसे की तेजी के साथ 86.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
👉 बीते महीने रुपया 87.94 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ था, लेकिन अब इसमें 1.58% सुधार देखने को मिला है।
👉 एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
तीन दिनों में कितनी आई मजबूती?
📌 सोमवार – 24 पैसे की बढ़त, 86.81 प्रति डॉलर
📌 गुरुवार – 17 पैसे की बढ़त, 87.05 प्रति डॉलर
📌 मंगलवार – 26 पैसे की बढ़त, 86.55 प्रति डॉलर
📌 तीन दिन में कुल बढ़त – 67 पैसे (0.77%)
क्यों मजबूत हो रहा रुपया?
✅ भारत के मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा – आर्थिक स्थिति में सुधार से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
✅ डॉलर की कमजोरी – अमेरिका के निराशाजनक आर्थिक आंकड़ों के कारण डॉलर इंडेक्स 103.32 तक गिरा।
✅ एशियाई मुद्राओं की मजबूती – इससे रुपये को सपोर्ट मिला।
✅ शेयर बाजार में उछाल – बीएसई सेंसेक्स 1,131 अंक और निफ्टी 325 अंक चढ़ा।
आगे क्या होगा? रुपये की रफ्तार बनी रहेगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपया अभी और मजबूत हो सकता है। मिराए एसेट शेयरखान के अनुज चौधरी का कहना है कि,
📌 वैश्विक इक्विटी मार्केट मजबूत रहने से रुपये को सपोर्ट मिलेगा।
📌 हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और एफआईआई की बिकवाली रुपये की तेजी को रोक सकते हैं।
📌 डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट 86.3 से 86.80 के बीच रह सकता है।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट और भारत का व्यापार घाटा
📉 डॉलर इंडेक्स – 103.32 तक गिरा, जो 5 महीने का लोअर लेवल है।
📉 भारत का व्यापार घाटा – साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर आ गया है।
📉 निर्यात और आयात दोनों में गिरावट – तेल और सोने के आयात में भारी कमी आई।
शेयर बाजार में भी आई तेजी!
📈 बीएसई सेंसेक्स – 1,131.31 अंक (1.53%) की बढ़त के साथ 75,301.26 पर बंद।
📈 निफ्टी – 325.55 अंक (1.45%) की बढ़त के साथ 22,834.30 पर बंद।
📉 एफआईआई ने 4,488.45 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे बाजार में हलचल रही।
निष्कर्ष
💡 रुपये की तेजी जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली इसमें रुकावट डाल सकती हैं। निवेशकों को अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर नजर रखनी होगी।
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