अक्सर मेनोपॉज की चर्चा होती है, लेकिन पुरुषों में भी उम्र बढ़ने के साथ हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसे “एंड्रोपॉज” कहा जाता है। सीनियर यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, यह महिलाओं की रजोनिवृत्ति जैसा तो नहीं है, लेकिन कुछ समानताएं जरूर हैं। एंड्रोपॉज में उम्र के साथ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। आमतौर पर यह प्रक्रिया 50 साल की उम्र के आसपास शुरू होती है और धीरे-धीरे असर दिखाती है।
एंड्रोपॉज के लक्षण:
डॉक्टर के अनुसार, एंड्रोपॉज से प्रजनन क्षमता पर सीधा असर नहीं पड़ता, जैसा कि महिलाओं में रजोनिवृत्ति के दौरान होता है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
थकान महसूस करना
कामेच्छा में कमी
मूड स्विंग्स
मांसपेशियों की कमी
शरीर में चर्बी बढ़ना
ये बदलाव टेस्टोस्टेरोन के गिरते स्तर के कारण होते हैं, लेकिन तनाव, पुरानी बीमारियां और खराब जीवनशैली भी इन्हें बढ़ा सकती हैं।
क्या एंड्रोपॉज से डरना चाहिए?
इस सवाल के जवाब में डॉक्टर कहते हैं कि डरने की जरूरत नहीं है। यह उम्र बढ़ने की स्वाभाविक प्रक्रिया है, और अधिकांश पुरुषों को हल्के लक्षणों का ही अनुभव होता है। हालांकि, अगर किसी को ज्यादा परेशानी हो रही हो, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। रक्त परीक्षण से टेस्टोस्टेरोन का स्तर जांचा जा सकता है। यदि स्तर असामान्य रूप से कम हो, तो टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (टीआरटी) एक विकल्प हो सकता है। लेकिन टीआरटी का उपयोग केवल डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे हृदय संबंधी समस्याएं और प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
एंड्रोपॉज को मैनेज करने के उपाय:
डॉक्टर एंड्रोपॉज के प्रभावों को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं।
नियमित व्यायाम करें।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
पर्याप्त नींद लें।
तनाव को नियंत्रित करें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
निष्कर्ष:
एंड्रोपॉज उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा है। इसे लेकर चिंता करने की बजाय जागरूक होना जरूरी है। सही दिनचर्या और स्वास्थ्य का ध्यान रखकर इस प्रक्रिया को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है।
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