भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने आतिथ्य तथा पर्यटन क्षेत्र को उद्योग तथा बुनियादी ढांचे का दर्जा देने की मांग पर सोमवार को कहा कि इससे जुड़े लोग राजनेताओं को बताएं कि क्षेत्र 2030 तक 2.5 करोड़ नौकरियों का सृजन कर सकता है।
होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएआई) द्वारा आयोजित छठे होटलियर्स कॉन्क्लेव में कांत ने कहा कि किसी तरह पर्यटन उद्योग राजनेताओं को यह बताने में विफल रहा है कि वह नौकरियों का सृजन करने वाला एक बड़ा क्षेत्र है…
उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप पर्यटन को देखते हैं, तो मुझे लगता है कि राजनीतिक नजरिए से राजनेता केवल एक ही बात समझते हैं और वह यह है कि पर्यटन क्षेत्र कितनी नौकरियों का सृजन कर रहा है।” कांत ने कहा, ‘‘आपके द्वारा सृजित प्रत्येक प्रत्यक्ष रोजगार पर पर्यटन का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। आप अप्रत्यक्ष तौर पर सात रोजगार का सृजन करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि किसी तरह पर्यटन उद्योग राजनेताओं को यह बताने में विफल रहा है कि वह नौकरियों का सृजन करने वाला एक बड़ा क्षेत्र है…”
उन्होंने कहा कि रोजगार के मामले में थाईलैंड करीब दो करोड़ नौकरियां, मलेशिया करीब 1.5 करोड़ नौकरियां और भारत पर्यटन क्षेत्र से 78 लाख नौकरियों का सृजन करता है। एचएआई के क्षेत्र को उद्योग तथा बुनियादी ढांचे का दर्जा देने की मांग के जवाब में कांत ने कहा, ‘‘पर्यटन उद्योग के लिए केंद्र तथा राज्यों की राजनीतिक व्यवस्था को यह बताना सार्थक होगा कि यदि आप पर्यटन पर ध्यान देते हैं तो हम 2030 तक 2.5 करोड़ नौकरियों का सृजन करेंगे…” उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक व्यवस्था के सामने यह लक्ष्य रखा जाए कि पर्यटन क्षेत्र से 2.5 करोड़ नौकरियों का सृजन होगा तो इसका राजनीतिक व्यवस्था की सोच पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा और वे पर्यटन के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
– एजेंसी
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