प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि विविधता में एकता का भारत का मंत्र इतना व्यापक है कि इसमें विभाजन की कोई गुंजाइश नहीं है और जैसे-जैसे देश आगे बढ़ेगा विकास और विरासत साथ-साथ आगे बढ़ते रहेंगे।
प्रगति मैदान के भारत मंडपम में श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि अब भारत में वंदे भारत ट्रेन अयोध्या और मथुरा-वृंदावन के कायाकल्प के साथ चलेगी।
उन्होंने आध्यात्मिक गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी 150वीं जयंती उस समय मनाई जा रही है, जब महज कुछ दिन पहले अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का सदियों पुराना सपना पूरा हुआ है।
अयोध्या में राम मंदिर और 22 जनवरी को वहां संपन्न हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इतना बड़ा महायज्ञ संतों के आशीर्वाद से ही पूरा हुआ।
उन्होंने कहा, ”हम ऐसे समय में श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती मना रहे हैं, जब कुछ ही दिन पहले भव्य राम मंदिर का सदियों पुराना सपना पूरा हुआ था। आपके चेहरे पर दिख रहा उत्साह रामलला ‘विराजमान’ की खुशी का भी संकेत देता है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, ”विविधता में एकता का भारत का मंत्र इतना सरल और व्यापक है कि इसमें विभाजन की कोई गुंजाइश नहीं है।”
उन्होंने कहा कि 15वीं शताब्दी के संत चैतन्य महाप्रभु भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम के प्रतीक थे।
मोदी ने कहा, ”उन्होंने आध्यात्मिकता और साधना को आम लोगों तक पहुंचाया।”
प्रधानमंत्री ने आध्यात्मिक गुरु के सम्मान में एक विशेष डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया।
प्रभुपाद गौड़ीय मिशन के संस्थापक थे, जिन्होंने वैष्णव सम्प्रदाय के मौलिक सिद्धांतों को संरक्षित करने और फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गौड़ीय मिशन ने श्री चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं और दुनिया भर में वैष्णव धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे यह ‘हरे कृष्ण’ आंदोलन का केंद्र बन गया है।
– एजेंसी
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