महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि विभिन्न सरकारी विभाग शक्ति विधेयक के प्रावधानों की सावधानीपूर्वक समीक्षा कर रहे हैं ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कहीं यह (विधेयक) केंद्रीय अधिनियमों की अवहेलना तो नहीं करेगा।
शक्ति विधेयक में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। फडणवीस ने विधान परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि यह आकलन करना महत्वपूर्ण है कि क्या शक्ति विधेयक के प्रावधान विभिन्न फैसलों के माध्यम से उच्चतम न्यायालय द्वारा तय किये गए दिशा-निर्देशों से असंगत तो नहीं होंगे।
उपमुख्यमंत्री ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के एमएलसी अमोल मिटकरी के सवाल के जवाब में यह बात कही।
आंध्र प्रदेश के दिशा अधिनियम और इसी तरह के अन्य कानूनों से प्रेरित शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2020 को दिसंबर 2021 में राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किया गया था और इसे पिछले साल राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा गया था।
फडणवीस ने विधेयक के प्रावधानों के व्यापक मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि केंद्र सरकार भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के दायरे के भीतर ही नए कानून बनाने की प्रक्रिया में है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सात से आठ विभाग केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित आगामी कानूनी ढांचे पर शक्ति विधेयक के संभावित प्रभाव का पता लगाने और यह निर्धारित करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं कि क्या यह केंद्रीय अधिनियमों की अवहेलना करेगा।
– एजेंसी
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