वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने बुधवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय में मुकदमों को सूचीबद्ध करने और उन्हें अन्य पीठों को पुन: आवंटित करने की ‘कुछ घटनाओं’ को लेकर नाराजगी जतायी तथा तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
यह खुला पत्र तब लिखा गया है जब एक दिन पहले उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संजय किशन कौल ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पदोन्नति और स्थानांतरण के विषय पर कॉलेजियम की सिफारिशों पर कदम उठाने में केंद्र सरकार की कथित देरी से संबंधित याचिकाओं को वाद सूची से अचानक हटाए जाने पर हैरानी जतायी। प्रशांत भूषण समेत कुछ वकीलों ने यह मुद्दा उठाया था।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के पूर्व अध्यक्ष दवे ने कहा, ”मैं उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा मुकदमों को सूचीबद्ध किए जाने को लेकर कुछ घटनाओं से बहुत दुखी हूं।”
उन्होंने कहा कि ”मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और वैधानिक व संवैधानिक निकायों के कामकाज” से जुड़े कुछ मामले संवेदनशील प्रकृति के हैं।
दवे ने इस पर खेद जताया कि उन्हें कुछ वकीलों द्वारा सीजेआई से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने के प्रयास कामयाब नहीं होने के बाद यह खुला पत्र लिखना पड़ा है।
उन्होंने उच्चतम न्यायालय में मुकदमों को सूचीबद्ध करने से जुड़ी संवैधानिक योजनाओं और नियमों तथा मामलों को सूचीबद्ध करने के सीजेआई के प्रशासनिक अधिकार का भी उल्लेख किया।
– एजेंसी
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