प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के कान्हा शांति वनम में एक सार्वजनिक समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के महत्व को रेखांकित करते हुए युवाओं को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने के लिए आध्यात्मिक संस्था से सहयोग मांगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समृद्धि पैसे और भौतिक चीजों से नहीं आती, यह सांस्कृतिक मूल्यों की मजबूती से भी आती है। आज भारत आर्थिक, सांस्कृतिक और कई क्षेत्रों में बड़ी प्रगति कर रहा है। यह एक नये युग में प्रवेश कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को गुलाम बनाने वालों ने हमारी असली ताकत ज्ञान, ध्यान, योग, आयुर्वेद जैसी कई महत्वपूर्ण परंपराओं पर हमला बोला था। इसका देश को बहुत नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन अब समय बदल रहा है और भारत भी बदल रहा है। ये भारत की आजादी का अमृतकाल है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी इस विरासत को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाएं। इसमें श्री रामचंद्र मिशन और उससे जुड़े साधकों की, आप सबकी बहुत बड़ी भूमिका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत काल के इस दशक में हमारा ध्यान महिला, युवा, श्रम और उद्यम क्षेत्र पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मानवता के लिए कमलेश डी. पटेल ने जो काम किया वह अद्भुत है। हमारी सरकार को उनके योगदान को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने का सौभाग्य मिला। आजकल हमने पद्म पुरस्कारों की ऐसी परंपरा बना दी है कि पुरस्कार स्वयं सम्मानित हो जाते हैं।
– एजेंसी
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