भारत के पूर्व फुटबॉल कप्तान बाइचुंग भूटिया ने आरोप लगाया कि ग्लेशियर झील में जलस्तर बढ़ने और अचानक बाढ़ आने के बाद प्रेम सिंह तमांग सरकार द्वारा समय पर कदम नहीं उठाये जाने के कारण हिमालयी राज्य में कई लोगों को जान गंवानी पड़ी।
ग्लेशियर से बनी लोनाक झील में पानी का स्तर अचानक बढ़ जाने से तीस्ता नदी में बाढ़ आ गई थी, जिससे सिक्किम के चार जिलों से गुजरने वाली इस नदी के आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही देखी गई थी। इस दौरान 15 सेनाकर्मियों सहित 42 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 77 अन्य लापता और 30 अन्य घायल हो गए थे।
भूटिया ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, ”अगर तमांग और उनकी सरकार ने तीन अक्टूबर की रात को ग्लेशियर झील में पानी का स्तर बढ़ने के बाद तुरंत कदम उठाये होते तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।”
दक्षिण सिक्किम के मूल निवासी भूटिया ने आरोप लगाया कि तमांग ने प्राकृतिक आपदा को लेकर विरोधाभासी बयान दिए हैं।
भूटिया ने कहा कि वह प्राकृतिक आपदा का राजनीतिकरण करने या इसका फायदा उठाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक चिंतित नागरिक होने के नाते अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।
अचानक आई बाढ़ ने सिक्किम में सड़क के बुनियादी ढांचे और संचार नेटवर्क को भी नष्ट कर दिया था।
– एजेंसी
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