नीता (अपनी सहेली सीमा से) – तुम्हारी हैदराबाद यात्रा कैसी रही?
सीमा (नीता से)- अरे क्या बताऊं। रास्ते में मेरे पति पानी लेने उतरे
और गाड़ी चल दी। वह स्टेशन पर ही रह गये।
नीता (सीमा से)- मैं समझ रही हूं तुम्हारी पीड़ा। इतने लंबे सफर में तुम्हें
प्यासा ही रहना पड़ा।😜😂😂😂😛🤣
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नीता (पति से) – अजी, क्या यह सच है कि रुपये-पैसे बोलते है?
पति (नीता से)- हां, कहते तो ऐसा ही है।
इस पर पत्नी बोली- तो फिर तुम मुझे कुछ पैसे दे जाना। मैं घर में
अकेली बैठी बोर होती रहती हूं।😜😂😂😂😛🤣
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नीता ने उलाहने भरे स्वर में कहा, ‘अगर तुम अक्ल से काम लेते तो हर
महीने इतनी बचत कर लेते कि मेरे लिए कम से कम दो साड़ियां अवश्य
खरीद लेते।‘
‘अगर मैं अक्ल से काम लेता तो मुझे साड़ियो को खरीदने की कभी नौबत
ही नहीं आती।‘ पति ने मुस्कुरा के जवाब दिया।😜😂😂😂😛🤣
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नीता(पति से)- जब भी तुम स्कूटर मोड़ते हो, तो मुझे बहुत डर लगता
है।
पति (नीत से)- तो इसका मतलब यह है कि तुम भी मेरी तरह डरपोक
हो। मैं तो मोड़ पर आंखे बंद कर लेता हूं। आगे से तुम भी ऐसा ही किया
करो।😜😂😂😂😛🤣
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