मृत्यु शैय्या पर पड़े अपने पिता के पास रवि खड़ा था. पिता ने मरते स्वरों में रवि को ज्ञान देना चाहा – “बेटे, हमेशा ध्यान रखना कि धन से सुख नहीं मिलता है..”
“जी पिता जी मैं ध्यान रखूंगा”, रवि ने सहमति दर्शाई – “परंतु धन से दुख की मात्रा अपने अनुरूप की जा सकती है”😜😂😂😂😛🤣
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एक दिन रवि एक मशहूर मनोचिकित्सक के पास पहुँचा और उससे निवेदन किया कि क्या वो उसका व्यक्तित्व विभाजित (पर्सनॉलिटी स्प्लिट) कर सकता है.
“तुम्हारा व्यक्तित्व विभाजित करना?” डॉक्टर ने आश्चर्य से पूछा – “यहाँ तो स्प्लिट पर्सनालिटी वाले इलाज के लिए आते हैं और ठीक होकर जाते हैं. तुम तो उलटे इस काम के लिए कह रहे हो! भला क्यों?”
“इसलिए कि,” रवि ने जवाब दिया – “मैं बेहद अकेलापन महसूस करता हूँ.”😜😂😂😂😛🤣
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