एक थे कंजूस सेठजी।
एक बार दिल्ली गए, तो जेब कटने के डर से डीटीसी की बस में नहीं बैठे। अभी चाँदनी चौक के नजारे देखकर खुश हो
ही रहे थे कि ड्रायवर ने घोषणा कर दी- ‘सेठजी! बुरा हो गया, इस गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए।
सुनकर सेठजी जोर से चीखे – अरे! फटाफट टैक्सी का मीटर बंद कर दो, सरदारजी! वर्ना इससे भी बुरा हो जाएगा।😜😂😂😂😛🤣
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कब्रस्तान में राहुल एक कब्र खोद रहा था। खोदते-खोदते शाम हो
गई और ठंड भी बढ़ गई। राहुल ने आवाजें दे-देकर एक राहगीर
को पास बुलाया और कहा-
‘ऐ भाई! बहुत ठंड लग रही है। नुक्कड की दुकान से जरा चाय तो
भेजते जाना।
राहगीर ने कुछ और ही तुक्का जड दिया। ‘भाई ठंड तो तुम्हें लगेगी ही।
भाई लोगों ने तुम्हें कब्र में तो उतार दिया, मगर तुम पर मिट्टी डालना
बिल्कुल ही भूल गए।😜😂😂😂😛🤣
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राहुल मुम्बई की सैर करके जब वापस गाँव पहुँचे तो लोगों ने घेर लिया – ‘मुम्बई कैसी है? हमें उसके हाल सुनाओ!
राहुल हुक्का गुड़गुडाकर बोले – ‘मुम्बई है तो जोरदार नगरी, पर वहाँ की सरकार बड़ी कंजूस है। पता है एक ड्रायवर की तनख्वाह बचाने के लिए बस के ऊपर, बस रखकर चलाती है। हाँ!😜😂😂😂😛🤣
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