प्राइमरी क्लास में मास्टर साहब गणित सिखा रहे थे.
मास्टर साहब – “बेटा, मान लो मैंने तुम्हें 10 लड्डू दिए !
”राहुल – “क्यों मान लूँ … आपने तो मुझे एक भी नहीं दिया ?
”मास्टर साहब – “अरे मान ले न ! मानने में तेरे बाप का क्या जाता है ?
”राहुल– “ठीक है …”
मास्टर साहब – “हाँ, तो उसमें से 5 तुमने मुझे वापस दे दिए…
तो बताओ तुम्हारे पास कितने लड्डू बचे ?
”राहुल – “20 !!!”
मास्टर साहब – “कैसे ?
”राहुल– “मान लीजिए ना ! मानने में आपके बाप का क्या जाता है !!!”😜😂😂😂😛🤣
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एक कंजूस आदमी जिंदगी भर अपने पुत्रों को कम से कम खर्च करने की हिदायतें देता रहा था।
जब वह मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया तो पुत्र आपस में मशवरा करने लगे कि किस प्रकार पिता की इच्छा के अनुसार कम से कम खर्च में उनकी अंतिम यात्रा निपटाई जाए।
एक ने कहा – ”ऐम्बुलेंस में ले जाया जाए।”
दूसरे ने कहा – ”नहीं, ऐम्बुलेंस बहुत मंहगी होगी। ठेलागाड़ी में ले चलते हैं।”
तीसरे ने कहा – ”क्यों न साइकिल पर बांधकर ले चलें?”
यह सब सुनकर कंजूस से रहा नहीं गया। उठकर बोला –
”कुछ मत करो, मेरा कुर्ता और जूते ला दो। मैं पैदल ही चला जाऊंगा।”😜😂😂😂😛🤣
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