पूजा: हॅलो! कहाँ हो?
पति: याद है, पिछली दीपावली पर हम एक
ज्वेलरी की दुकान में गये थे… जहाँ तुम्हें एक हार
पसंद भी आ गया था।
पूजा: हाँ! याद आया…
पति: और उस समय मेरे पास पैसे नहीं थे।
पूजा (खुशी से): हाँ! हाँ! याद है।
पति: और फिर मैंने कहा था कि ये हार एक दिन
मैं तुम्हें लेके दूँगा।
पूजा (और ज़्यादा खुशी से): हाँ हाँ हाँ.. बहुत
अच्छी तरह से याद है।
पति: तो बस उसी की बगल वाली दुकान में
बाल कटवा रहा हूँ…थोड़ा लेट आऊँगा!!😜😂😂😂😛🤣
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नेता – हाँ. अब सही समय आ गया है.
जनता- क्या आप देश को लूट खाओगे ?
नेता – बिल्कुल नही.
जनता – हमारे लिए काम करोगे?
नेता – हाँ. बहुत.
जनता – महगांई बढ़ाओगे?
नेता – इसके बारे में तो सोचो भी मत.
जनता – आप हमे जॉब दिलाने में मदद करोगे ?
नेता – हाँ. बिल्कुल करेंगे.
जनता -क्या आप देश मे घोटाला करोगे?
नेता – पागल हो गए हो क्या बिलकुल नहीं.
जनता – क्या हम आप पर भरोसा कर सकते हैं ?
नेता – हाँ
जनता – नेता जी …
चुनाव जीतकर नेताजी वापस आये
अब आप, नीचे से ऊपर पढ़ो.😜😂😂😂😛🤣
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पूजा : जरा किचन से आलू लेते
आना।
पति : यहां तो कहीं आलू दिख
नहीं रहे हैं।
पूजा: तुम तो हो ही अंधे,
कामचोर हो। एक काम ढंग से
नहीं कर सकते,
मुझे पता था कि तुम्हें नहीं
मिलेंगे, इसलिए में पहले ही ले
आई थी!
अब आदमी की कोई गलती हो
तो बताओ…😜😂😂😂😛🤣
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