ग्रीन कॉफी बनाने के लिये कॉफी के पौधे से हरे रंग के बीजों को अलग किया जाता है और फिर उनको रोस्ट किया जाता है. इसे पीसकर फिर कॉफी पाउडर बनता है. कई बार ग्रीन बीजों को बिना भूने सुखाकर भी ग्रीन कॉफी का पाउडर तैयार किया जाता है. सिंपल भाषा में कहें तो कॉफी बींस को पूरी तरह बिना पकाये बिना रोस्ट किये ग्रीन कलर के ही कॉफी बीन्स से जो कॉफी बनती है वो ग्रीन कॉफी कहलाती है.
ग्रीन कॉफी में एंटीओबेसिटी फैक्टर होता है जिससे ये फैट कम करने में मददगार है. साथ ही ग्रीन कॉफी में मैक्रो नुट्रिएंट्स कार्बोहाइड्रेट्स भी होता है जिससे पेट भरा हुआ फील होता है और भूख कम लगती है. ग्रीन कॉफी से मेटाबॉलिज्म ठीक बना रहता है.
कुछ रिसर्च में ये भी पाया गया है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी इससे फायदा होता है और 1 बार इस कॉफी के सेवन से बीपी कंट्रॉल में रहता है.ग्रीन कॉफी से हार्ट अटैक, क्रॉनिक किडनी फेल्योर जैसी बड़ी बीमारियों को भी रोका जा सकता है.
ग्रीन कॉफी बीन्स में भरपूर विटामिन और मिनरल्स भी होते हैं जिससे बॉडी हाइड्रेटेड नहीं रहती और हमारे शरीर में न्यूट्रिशन बने रहते हैं. इसे पीने से पेट खाली फील नहीं होता और एनर्जी बनी रहती है.
ग्रीन कॉफी में कैफीन काफी ज्यादा होता है जिसे सिरदर्द में पीने से थोड़ी देर के लिये सिरदर्द से राहत मिल जाती है. ग्रीन कॉफी में कैल्शियम भी पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं.
एक ग्रीन कॉफी का कप पीने से तनाव में भी राहत मिलती है. अगर आपको कॉफी पसंद है तो ब्रेक में या जिस टाइम मन करे एक कप ग्रीन कॉफी का सेवन करें इससे फील गुड फैक्टर आता है और तनाव कम होता.
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