किसी भी चीज़ की अधिकता जीवन में जहर के समान हो जाती है, फिर चाहे वो सेहत के लिए फायदेमंद बताया जाने वाला पानी ही क्यों न हो. पानी पीने से शरीर का जल संतुलन बना रहता है और टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद मिलती है. हालांकि बाकी चीज़ों की तरह पानी के ज्यादा सेवन के भी शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं. गुरुग्राम के नारायण हॉस्पिटल में डायटीशियन परमीत कौर का कहना है कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने से खून की मात्रा बढ़ जाती है और किड़नी पर ज्यादा पानी को फ़िल्टर करने का दबाव भी बढ़ जाता है.
जरूरत से ज्यादा पानी पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ सकता है और खून में सोडियम के लेवल को कम कर सकता है, जिससे हाइपोनेट्रेमिया नाम की स्थिति पैदा हो सकती है. हाइपोनेट्रेमिया के लक्षणों में- जी मिचलाना, सिरदर्द होना, दुर्बलता, चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों में ऐंठन आदि शामिल हैं.
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन ने पानी पीने से जुड़े दिशानिर्देश स्थापित किए हैं. एक हेल्दी व्यक्ति को रोजाना लगभग 9 से 13 कप पानी पीना चाहिए.
ज्यादा पानी पीने की वजह से बॉडी में सोडियम का लेवल कम हो सकता है. इस स्थिति को ही हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है. दिल और किडनी से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को हाइपोनेट्रेमिया का खतरा ज्यादा होता है.
बीएमजे में पब्लिश एक स्टडी में कहा गया है कि ज्यादा पानी पीने से खून में सोडियम और बाकी इलेक्ट्रोलाइट्स पतला हो जाता है, जिसकी वजह से शरीर में सोडियम का लेवल कम हो जाता है. शरीर में सोडियम का लेवल कम होने के कारण मांसपेशियों में ऐंठन जैसी शारीरिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
ज्यादा पानी पीने से ज्यादा पेशाब आता है. क्योंकि जब आप ज्यादा पानी पीते हैं तो किडनी को लगातार काम करना पड़ता है. इसके अलावा, अध्ययनों से मालूम चलता है कि बार-बार पेशाब आना किडनी पर ज्यादा दबाव का कारण बनता है.
ओवरहाइड्रेशन से हाइपोकैलिमिया या बॉडी में पोटेशियम के लेवल में कमी आती है. इसकी वजह से दस्त और काफी लंबे समय तक पसीना आता है. क्लीवलैंड क्लिनिक की वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाइपोकैलिमिया अक्सर सीधे डाइजेशन सिस्टम को प्रभावित करता है.
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