रतलाम (एजेंसी/वार्ता) मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की एक अदालत ने लगभग दस वर्ष पहले दो गुटों के बीच हुए संघर्ष से जुड़े अापराधिक मामले में आज ग्यारह आरोपियों को दोषी जाए जाने पर इन्हें जेल भेज दिया। अभियोजन के अनुसार स्थानीय औद्योगिक थाना क्षेत्र में जनवरी 2012 की रात्रि में दो पक्षों के बीच संघर्ष के दौरान दोनों ने एक दूसरे पर पिस्टल से फायरिंग कर और तलवारों से हमले किए थे।
पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से प्रकरण दर्ज कर जांच के बाद आरोपपत्र अदालत में पेश किया था। पहला प्रकरण रितेश भदौरिया की रिपोर्ट पर दर्ज किया गया था, जिसमें यतेन्द्र भारद्वाज, ऋषि जायसवाल, अमित जायसवाल और मयंक जाट नामजद आरोपी बनाए गए थे और कुछ अन्य अज्ञात लोग आरोपी थे। इस प्रकरण के अनुसंधान के बाद पुलिस ने इसमें इन चारों के अलावा भूपेश नेगी, किशोर चौहान, यौगेन्द्र सिंह और रमेश (कुल आठ) को भी आरोपी बनाया था।
दूसरा प्रकरण एक राजनैतिक दल के महापौर पद के प्रत्याशी रहे मयंक जाट की रिपोर्ट पर दर्ज किया गया था। मयंक जाट की रिपोर्ट पर पुलिस ने एक अन्य दल से जुड़े नेता भगत भदौरिया, रितेश भदौरिया, रितेश नाथ उर्फ कालू, रवि मीणा और शरद भाटी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया था।
दोनों प्रकरणों के कुल तेरह आरोपियों में से रितेश भदौरिया और रमेश की प्रकरण के विचारण के दौरान मृत्यु हो गई।इसलिए कुल ग्यारह आरोपियों के मामले में सुनवायी हुयी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश लक्ष्मण वर्मा की अदालत ने मयंक जाट और भगत सिंह भदौरिया समेत कुल ग्यारह आरोपियों को आज दोषी पाया।
मयंक जाट गुट के सात लोगों को हत्या के प्रयास के मामले में छह-छह वर्ष का कारावास और भगतसिंह भदौरिया के गुट के चार लोगों को हत्या के प्रयास के सिलसिले में सात सात वर्ष का कारावास सुनाया गया है। इसके बाद सभी ग्यारह अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया। आज अदालत परिसर में ऐहतियातन सुरक्षा के आवश्यक प्रबंध किए गए थे।
-एजेंसी/वार्ता
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