रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अपने विस्तार को कंपनी की भविष्य की विकास रणनीति का प्रमुख आधार बताया है। कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में रिलायंस के न्यू एनर्जी कारोबार का नेतृत्व कर रहे अनंत अंबानी ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 से न्यू एनर्जी व्यवसाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में सार्थक योगदान देना शुरू कर देगा।
उन्होंने बताया कि कंपनी की सौर ऊर्जा उत्पादन श्रृंखला से व्यावसायिक राजस्व चालू वित्त वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि बैटरी निर्माण संयंत्र का पहला चरण भी इसी वर्ष शुरू होने वाला है। रिलायंस का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में किए गए निवेश आने वाले वर्षों में कंपनी की आय के नए स्रोत बनेंगे।
रिलायंस ने हाल ही में दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग सीएंडटी के साथ लगभग 3 अरब डॉलर के ग्रीन अमोनिया आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी के अनुसार, यह विश्व के बड़े ग्रीन अमोनिया ऑफटेक समझौतों में से एक है और ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में उसकी व्यावसायिक क्षमता को दर्शाता है।
जामनगर में विकसित किया जा रहा धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स कंपनी की इस रणनीति का केंद्र है। लगभग 5,000 एकड़ में फैले इस परिसर में सोलर पीवी सेल, मॉड्यूल और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इसकी सौर मॉड्यूल उत्पादन लाइनें शुरू हो चुकी हैं और प्रारंभिक उत्पादन भी हो चुका है।
ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में रिलायंस 40 गीगावॉट-आवर वार्षिक क्षमता वाली बैटरी एवं ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) फैक्ट्री विकसित कर रही है, जिसे भविष्य में 120 गीगावॉट-आवर क्षमता तक विस्तारित करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
इसके साथ ही कंपनी गुजरात के कच्छ क्षेत्र में लगभग 5.5 लाख एकड़ में विशाल रिन्यूएबल एनर्जी हब विकसित कर रही है। रिलायंस का दावा है कि पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर यह परियोजना प्रतिवर्ष 40 अरब यूनिट से अधिक हरित बिजली का उत्पादन कर सकेगी।
रोजगार के मोर्चे पर भी कंपनी ने बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। अनंत अंबानी के अनुसार, जामनगर गीगा कॉम्प्लेक्स और कच्छ स्थित अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं मिलकर लगभग 2 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित कर सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस का न्यू एनर्जी मिशन केवल एक व्यावसायिक विस्तार नहीं, बल्कि भारत के ऊर्जा संक्रमण में भागीदारी की दीर्घकालिक रणनीति है। यदि कंपनी अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और सौर ऊर्जा उसके विकास के प्रमुख इंजन बन सकते हैं। इससे न केवल कंपनी की आय के स्रोत विविध होंगे, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी बल मिलेगा।
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