गुरुवार, 19 मार्च, 2026 को भारतीय शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव—विशेष रूप से अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष—के कारण ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का डर पैदा हो गया था।
बेंचमार्क **BSE सेंसेक्स** 2,496.89 अंक, या 3.26% गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ, जबकि **NSE निफ्टी 50** 775.65 अंक, या 3.26% गिरकर 23,002.15 पर आ गया। यह लगभग दो वर्षों में दोनों सूचकांकों के लिए एक दिन की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक थी। इसने हालिया सुधार के सिलसिले को तोड़ दिया और निवेशकों की काफी संपत्ति—एक ही सत्र में लगभग ₹12 लाख करोड़—को खत्म कर दिया।
यह गिरावट तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण हुई। प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड लगभग $119 प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया (रिपोर्टों के अनुसार, इंट्राडे में लगभग 11% की वृद्धि)। रिपोर्टों में बताया गया कि ईरानी हमलों से सऊदी अरामको से जुड़ी रिफाइनरियों सहित कई सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है, और लाल सागर पर सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह पर कच्चे तेल की लोडिंग में कुछ समय के लिए रुकावट आई है। इन घटनाक्रमों ने संभावित लंबे समय तक आपूर्ति की कमी को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं, जिससे मुद्रास्फीति का डर और बढ़ गया और भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव पड़ा।
बाजार में अस्थिरता (Volatility) तेजी से बढ़ी; **India VIX** (डर का पैमाना) सत्र के दौरान लगभग 17-22% बढ़कर 21 से ऊपर के स्तर पर पहुंच गया। यह निवेशकों की बढ़ती घबराहट का संकेत था जो आगे भी जारी रह सकती है।
व्यापक बाजारों में भी यही कमजोरी देखने को मिली: मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में से प्रत्येक में लगभग 3% की गिरावट आई। सेक्टोरल (क्षेत्रीय) स्तर पर, ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण ऑटो क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद वैश्विक अनिश्चितता के बीच वित्तीय सेवाओं, IT और ऊर्जा से संबंधित शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
विश्लेषकों ने बताया कि बाजार में यह सतर्कता का माहौल भू-राजनीतिक जोखिमों, ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों और व्यापक आर्थिक चिंताओं के कारण बना था। हालांकि कुछ लोगों ने इस दबाव का कुछ श्रेय FII (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की निकासी और वैश्विक संकेतों को दिया, लेकिन इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया का संकट ही रहा। बाज़ार काफ़ी नीचे खुले (GIFT Nifty ने गैप-डाउन का संकेत दिया) और पूरे समय दबाव में रहे; विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब तक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
इस तेज़ गिरावट से यह बात साफ़ हो जाती है कि बाहरी झटके घरेलू शेयर बाज़ारों पर कितनी तेज़ी से असर डाल सकते हैं, और निवेशकों की चिंताओं का मुख्य केंद्र तेल है।
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