भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच **गौतम गंभीर** ने 19 मार्च, 2026 को **दिल्ली हाई कोर्ट के कमर्शियल डिवीज़न** में एक सिविल केस दायर किया है। इसमें उन्होंने AI-जनरेटेड डीपफेक, डिजिटल रूप से किसी और का रूप धारण करने (impersonation), और बिना इजाज़त के कमर्शियल इस्तेमाल के खिलाफ अपने **व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों** की तत्काल सुरक्षा की मांग की है।
इस याचिका में 16 प्रतिवादियों को निशाना बनाया गया है। इनमें कुछ खास सोशल मीडिया अकाउंट (जैसे: JanKey Frames, Bhupendra Paintola, Legends Revolution, gustakhedits, cricket_memer45, GemsOfCrickets, Crickaith, Sunny Upadhyay, @imRavY_), ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनियाँ (**Amazon**, **Flipkart**), प्लेटफॉर्म मध्यस्थ (**Meta Platforms Inc.**, **X Corp.**, **Google LLC/YouTube**), और सरकारी संस्थाएँ (**MeitY**, **DoT**) शामिल हैं, जिन्हें आदेशों को लागू करवाने के लिए प्रोफोर्मा पक्ष बनाया गया है।
गंभीर की कानूनी टीम ने बताया कि 2025 के आखिर से Instagram, X, YouTube और Facebook पर मनगढ़ंत सामग्री में भारी बढ़ोतरी हुई है। फेस-स्वैपिंग और वॉयस-क्लोनिंग जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल करके ऐसी असली जैसी नकली वीडियो बनाई गईं, जिनमें झूठे तौर पर उनके नाम से बयान दिखाए गए। इनमें शामिल हैं:
– एक फर्जी “इस्तीफे की घोषणा” वाली वीडियो, जिसे **29 लाख** से ज़्यादा बार देखा गया।
– एक क्लिप, जिसमें सीनियर क्रिकेटरों के वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के बारे में उनकी कथित टिप्पणियाँ दिखाई गईं, जिसे **17 लाख** से ज़्यादा बार देखा गया।
आरोप है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल करके बिना इजाज़त के पोस्टर और सामान बेचे।
**कॉपीराइट एक्ट**, **ट्रेड मार्क्स एक्ट**, **कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट**, और पिछली मिसालों (जैसे: अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, सुनील गावस्कर से जुड़े मामले) का हवाला देते हुए, इस केस में निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
– **₹2.5 करोड़** का हर्जाना।
– खातों का ब्योरा (Rendition of accounts)।
– बिना लिखित सहमति के उनके नाम, तस्वीर, आवाज़ या व्यक्तित्व का इस्तेमाल/दोबारा इस्तेमाल (AI, डीपफेक, मॉर्फिंग, फेस-स्वैपिंग के ज़रिए) करने पर स्थायी रोक।
– उल्लंघन करने वाली सामग्री को तत्काल हटाना।
CPC के आदेश XXXIX नियम 1 और 2 के तहत एक तत्काल, एकतरफा और अंतरिम रोक लगाने की अर्जी दायर की गई है, जिसका मकसद अंतिम सुनवाई होने तक इस सामग्री के प्रसार को रोकना है। एक बयान में गंभीर ने कहा: “मेरी पहचान—मेरा नाम, मेरा चेहरा, मेरी आवाज़—का इस्तेमाल कुछ गुमनाम अकाउंट्स द्वारा गलत जानकारी फैलाने और मेरे नाम पर पैसे कमाने के लिए एक हथियार के तौर पर किया गया है। यह सिर्फ़ मेरी निजी चोट का मामला नहीं है; यह कानून, गरिमा और उस सुरक्षा का मामला है, जिसके हकदार AI के इस दौर में हर सार्वजनिक हस्ती होती है।”
यह कदम मशहूर हस्तियों और सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाने वाले डीपफेक के गलत इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है।
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