स्ट्रोक महिलाओं में ज्यादा खतरनाक क्यों? ये कारण जानकर चौंक जाएंगे आप

स्ट्रोक को आमतौर पर पुरुषों की बीमारी माना जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है और इसके नतीजे भी अधिक गंभीर हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक महिलाओं में स्ट्रोक के बाद मृत्यु दर और लंबे समय तक विकलांगता का जोखिम पुरुषों से ज्यादा देखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी स्ट्रोक को महिलाओं की सेहत के लिए एक बड़ी चुनौती मानता है।

महिलाओं में स्ट्रोक ज्यादा खतरनाक क्यों होता है?

1. हार्मोनल बदलाव

महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान हार्मोन तेजी से बदलते हैं। एस्ट्रोजन हार्मोन में उतार-चढ़ाव ब्लड क्लॉट बनने का खतरा बढ़ा सकता है, जिससे स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है।


2. प्रेग्नेंसी और बर्थ कंट्रोल पिल्स

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और ब्लड क्लॉट बनने की आशंका रहती है। वहीं लंबे समय तक बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है, खासकर अगर महिला स्मोकिंग करती हो।


3. देर से पहचान होना

महिलाओं में स्ट्रोक के लक्षण कई बार अलग होते हैं जैसे:

  • अचानक ज्यादा थकान
  • उलझन या बेहोशी
  • मतली या सीने में दर्द
  • बोलने में परेशानी

इन लक्षणों को अक्सर गैस, कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।


4. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज

महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ हाई BP और डायबिटीज तेजी से बढ़ते हैं। ये दोनों ही स्ट्रोक के सबसे बड़े कारण माने जाते हैं।


5. ज्यादा उम्र तक जीना

महिलाएं आमतौर पर पुरुषों से ज्यादा उम्र तक जीवित रहती हैं। ज्यादा उम्र में स्ट्रोक का खतरा अपने आप बढ़ जाता है और रिकवरी भी धीमी होती है।


महिलाओं में स्ट्रोक के आम लक्षण

  • चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाना
  • हाथ या पैर में अचानक कमजोरी
  • बोलने में लड़खड़ाहट
  • अचानक तेज सिरदर्द
  • आंखों से धुंधला दिखना

इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।


स्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय

  • ब्लड प्रेशर और शुगर नियमित चेक कराएं
  • रोज कम से कम 30 मिनट वॉक या योग
  • नमक और तले-भुने भोजन से दूरी
  • स्मोकिंग और शराब से बचें
  • वजन कंट्रोल में रखें
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें

महिलाओं में स्ट्रोक ज्यादा खतरनाक इसलिए होता है क्योंकि हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याएं और देर से पहचान इसकी गंभीरता बढ़ा देती हैं। अगर समय रहते लक्षणों को पहचाना जाए और सही लाइफस्टाइल अपनाया जाए तो स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।